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प्रोफेसर त्यागी ने संभाला पदभार, डीयू के 22वें कुलपति बने

Fri, 11 Mar 2016 08:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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डीयू के नए कुलपति का स्वागत - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दक्षिणी एशियाई विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रोफेसर योगेश त्यागी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 22वें कुलपति के रुप में बृहस्पतिवार को पदभार संभाल लिया। पूर्व कुलपति प्रोफेसर दिनेश सिंह के विवादास्पद कार्यकाल समाप्त होने के बाद से यह पद सम कुलपति प्रोफेसर सुधीश पचौरी संभाले हुए थे। पचौरी की अगुवाई में डीयू पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। प्रोफेसर त्यागी ने अपनी नई पारी की शुरुआत पूजा-पाठ से की। इस अवसर उन्हें आशीर्वाद देने के लिए उनकी मां भी उपस्थित थीं।
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पदग्रहण कार्यक्रम में डीयू के कुछ पूर्व वीसी व अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति भी उपस्थित हुए। इस दौरान वहां उपस्थित कुलपतियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए डीयू को आगे बढ़ाने के संबंध में सुझाव दिए। वहीं प्रोफेसर त्यागी ने कहा कि वह यहां सबके साथ मिलकर काम करना चाहेंगे। किसी भी निर्णय को लेने से पहले हर किसी के विचारों को सुनेंगे और समझेंगे।

उन्होंने साफ कर दिया कि उन्हें डीयू के हर अधिकारी व कर्मचारी का सहयोग चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मैं यह नहीं कहता कि यहां कोई गलती नहीं होगी, लेकिन आश्वासन देता हूं कि कोई बेईमानी नहीं होने दी जाएगी।’ उनका यह प्रयास रहेगा कि उनसे किसी प्रकार की गलती न होने पाए। वैसे बता दें कि प्रो. त्यागी का कार्यकाल इसलिए भी अहम होगा कि 2021 में डीयू के 100 साल पूरे होने वाले हैं।
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पदभार ग्रहण कार्यक्रम में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के कुलपति तलत अहमद, डीयू के पूर्व वीसी उपेन्द्र बक्शी, दीपक पेंटल, गुजरात सेंट्रल विश्वविद्यालय केवीसी एचसी पटेल, प्रोफेसर गुरदीप सिंह, नेशनल लॉ यूनिवसिर्टी वीसी प्रोफेसर रणबीर सिंह, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के सलाहकार अमिताभ मट्टू समेत कई अन्य नामी प्रोफेसर उपस्थित थे।

कई पूर्व और वर्तमान कुलपति ने दिए सुझाव
कार्यक्रम में आए अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति ने डीयू को विश्व में टॉप 100 विश्वविद्यालयों में पहुंचाने के लिए कई सुझाव दिए। शिक्षकों के बैकलॉग को भरने को लेकर भी सुझाव प्राप्त हुए। निजी विश्वविद्यालयों  के खुलने से डीयू को मिल रही चुनौतियों से पार पाने के लिए भी सुझाव दिए गए। इस दौरान डीयू केपूर्व कुलपतियों ने अपने अनुभवों को भी साझा किया।
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