जिले के सरकारी स्कूलों में पढने वाली छात्राओं को के लिए जिला शिक्षा विभाग अपने स्तर पर 'मेरी लाडो करे पढ़ाई..' योजना शुरू करने जा रही है। इसके लिए होमवर्क शुरू कर दिया है।
इसमें विभिन्न कंपनियों के द्वारा सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत मदद ली जाएगी। इसके अलावा पंचायत से भी मदद लेने के लिए विभाग अभियान शुरू करेगा।
दरअसल, पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को सर्वशिक्षा अभियान के तहत मुफ्त शिक्षा दी जाती है, लेकिन नौंवी से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को फीस देनी पड़ती है।
एक विद्यार्थी पर औसतन 750 रुपये प्रति वर्ष खर्च होता है, लेकिन मजदूर तबके और प्रवासी परिवार इस फीस को देने में भी असमर्थ होते हैं। जिसकी वजह से छात्राएं स्कूल छोड़ देती है। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने इस नई योजना की शुरुआत करने का खाका तैयार किया है।
प्राथमिक संकलित आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 18 हजार छात्राएं है। प्रति छात्राएं 750 रुपये खर्च होता है। इस हिसाब से 1.35 करोड़ की जरुरत होगी। इसके लिए शिक्षा विभाग अलग से वेबसाइट तैयार कर रहा है।
इसमें एक व्यक्ति, कोई संगठन, गैर सरकारी संगठन, कॉरपोरेट कंपनियां और गांव के सरंपच आदि से मदद मांगी जा रही है। इस काम के लिए शिक्षा विभाग अपने शिक्षकों से भी मदद मांग रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. मनोज कौशिक का कहना है कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को बढ़ावा देने के लिए इसकी शुरुआत की जा रही है।
अगर कोई एक छात्रा की फीस का खर्च उठाना चाहता है, तो उसको दानवीर के रूप में नाम प्रकाशित किया जाएगा। वेबसाइट पर इसका ब्यौरा दिया जाएगा।