छात्रों को वर्ष 2016 के प्रोसेसर युक्त नवीन तकनीक के लैपटॉप ही दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि 10 हजार मेधावी छात्रों को वर्ष 2014 का प्रोसेसर युक्त लैपटॉप दिए जाने के मामले को सरकार गंभीरता से देखेंगी। इस मामले पर इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन के अधिकारियों को बुलाकर बात की जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि छात्रों को वर्ष 2016 के प्रोसेसर युक्त नवीन तकनीक के लैपटॉप ही दिए जाएंगे।
प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने प्वाइंट आफ आर्डर के तहत यह मेधावी छात्रों के लैपटॉप का मामला उठाया। प्रदेश सरकार 10वीं और 12वीं कक्षा के मेधावी छात्रों को लैपटॉप देती है। उन्होंने इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन की ओर से लैपटॉप खरीद को लेकर अपनाई जा रही टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि कारपोरेशन ने 9 अक्तूबर, 2015 को लैपटॉप देने के लिए प्री बीड टेंडर किए। इसमें कंपनियों शामिल हो गई, लेकिन 29 अक्तूबर को इस टेंडर को रद्द कर दिया। इसके बाद 29 फरवरी, 2016 को फिर टेंडर प्रकाशित किया गया। इसमें किसी भी कंपनी ने भाग नहीं लिया। इसके बाद फिर 14 मार्च को टेंडर बुलाया गया। जो 17 मार्च (वीरवार) को खोला जाना है।
उन्होंने कहा कि सरकार जो टेंडर प्रक्रिया अपनाई है। उसमें 2014 के प्रोसेसर लगाए जाने की बात कही गई है। उन्होंने प्रदेश सरकार से पूछा कि पहले टेंडर प्रक्रिया को क्या रद्द करना पड़ा? उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर को नए सिरे से किया गया।
उन्होंने सरकार से छात्रों को नई तकनीक वर्ष 2015 और 2016 का मॉडल दिए जाने की बात कही। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विषय है। शिक्षा का मामला है। छात्रों को नई तकनीक के वर्ष 2016 मॉडल का लैपटॉप दिया जाना चाहिए।