सरकारी स्कूलों में लगे 93 गेस्ट टीचरों का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गेस्ट टीचरों को किसी तरह का राहत देने से इनकार कर दिया है। इसके कारण 31 मार्च के बाद ऐसे अध्यापकों की सेवाएं स्वत: समाप्त हो सकती हैं।
दरअसल, पूर्ववर्ती सरकार में नियमों को ताक पर रखकर गेस्ट टीचरों की भर्ती की गई थी। इस कारण यह मामला कोर्ट में चला गया। पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को गेस्ट टीचरों को हटाने के आदेश दिए थे।
इसके बाद भी सरकार ने इन शिक्षकों की सेवाओं को जारी रखा था। इस पर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने गेस्ट टीचर्स के बारे में ब्योरा मांगा था।
इसके बाद बताया गया था कि 3581 गेस्ट टीचर शिक्षा विभाग में सरप्लस हैं। 20 नवंबर 2015 में सरकार की अर्जी पर हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2016 तक गेस्ट टीचरों की सेवाएं बहाल रखने की अनुमति दी थी।
इस आदेश में कोर्ट ने कहा था कि इस अवधि के बाद गेस्ट टीचरों की सेवाएं स्वत: समाप्त हो जाएंगी। अंतिम तिथि नजदीक आते देख एक बार फिर गेस्ट टीचरों में हलचल बढ़ गई है।
हालांकि सरकार ने इनकी सेवाएं अगस्त तक बढ़ाने की अर्जी लगाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर राहत देने से इनकार कर दिया। इसके कारण फरीदाबाद जिले के 93 गेस्ट टीचरों पर तलवार लटक गई है।
मौजूदा समय में ये 67 सरकारी स्कूलों में सामाजिक विज्ञान, गणित और हिंदी विषय पढ़ा रहे हैं। ऐसे में अगर 31 मार्च के बाद इन तीनों विषयों के 93 अध्यापकों को नौकरी से हटाया जाता है तो सरकारी स्कूलों में इन विषयों को पढ़ाने की समस्या हो जाएगी।