दिल्ली विश्वविद्यालय समेत देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) को स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) के पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग की गई है। डीयू विद्वत परिषद सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पत्र लिखकर यह मांग की है। उनके मुताबिक, ऐसा करने से छात्रों को भ्रष्टाचार से लड़ने में मदद मिलेगी।
प्रो. सुमन ने अपने पत्र में लिखा है कि डीयू समेत देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूजीसी की ओर से सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाने का निर्देश दिया गया है। पहली बार 2015 में जब छात्रों ने जागरूकता सप्ताह मनाया, तो उन्हें इतना भी नहीं पता था कि भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए किससे और कैसे शिकायत की जाए।
उन्होंने लिखा है कि जागरूकता सप्ताह से छात्रों को बेहद मदद मिली है। इससे न केवल छात्रों में जागरूकता बढ़ी है, बल्कि अपने कर्तव्यों की जानकारी भी मिली है। यूजीसी पाठ्यक्रम में ऐसे पाठों की संख्या बढ़ाए, जिसमें नीति, जीवन मूल्य, नैतिकता, सतर्कता, भ्रष्टाचार रोकने संबंधी नियमों को विस्तार से पढ़ाया जाए। यही नहीं पाठ्यक्रम में सूचना का अधिकार कानून राज्य स्तर पर कितना सफल हुआ है। क्या प्रश्नकर्ताओं को एक महीने के भीतर जवाब मिले हैं, यदि नहीं तो सीवीसी ने उन्हें क्या दंड दिया है। इन सबकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इससे छात्र जागरूक और प्रोत्साहित होंगे।