जिला प्रशासन की ओर से फीस बढ़ोतरी के मुद्दे पर नोटिस मिलने के बाद शहर के 30 से ज्यादा स्कूलों के प्रिंसिपल शुक्रवार को जिलाधिकारी से मिले और अपना पक्ष रखा। साथ ही कोर्ट में चल रहे केस का हवाला भी दिया।
उधर, प्रशासन का कहना है कि 7 स्कूलों की तरफ से 10 फीसदी से ज्यादा फीस बढ़ाई गई है। फीस बढ़ोतरी की जांच के लिए सीबीएसई को पत्र लिखा जाएगा । मांग की जाएगी कि वे नेशनल रेग्युलेटरी कमेटी बनाएं। इसके अलावा स्कूल प्रबंधकों को बढ़ी हुई फीस को लेकर बैठक करने की भी सलाह दी है।
गौरतलब है कि हाल ही में स्कूलों की ओर से मनमाने तरीके से बढ़ाई गई फीस पर अभिभावकों ने हंगामा किया था। इसके बाद प्रशासन ने 93 स्कूलों को नोटिस भेजा। उनसे फीस बढ़ोतरी की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। इसको लेकर स्कूल प्रबंधक डरे हुए हैं।
इसी मुद्दे पर 30 से ज्यादा स्कूलों के प्रिंसिपलों ने शुक्रवार सुबह 10 बजे जिलाधिकारी एनपी सिंह के साथ मिलकर बैठक की। सिंह ने बताया कि फीस बढ़ोतरी के मामले में स्कूलाें ने कोर्ट में चल रहे केस का हवाला दिया है।
लेकिन, स्कूलों की ओर से प्रशासन को ईडब्ल्यूएस कोटे में दिए गए दाखिले का पूरा ब्योरा देना होगा। इसी शर्तों पर स्कूलों को जमीन दी गई है, अगर उनका उल्लंघन होगा तो उन पर सख्त कार्रवाई होगी।
स्कूल प्रबंधकों से मांगा जवाब
सिटी मजिस्ट्रेट बच्चू सिंह ने बताया फीस बढ़ोतरी को लेकर सीबीएसई को पत्र लिखकर मांग की जाएगी कि वो नेशनल रेग्युलेटरी कमेटी बनाएं। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधकों से जवाब मांगा गया है कि वो डेवलपमेंट चार्ज क्यों ले रहे हैं। स्कूल ऐसे डेवलपमेंट चार्ज नहीं ले सकता है। स्कूलों में ड्रेस और किताबों की दुकानों के बारे में भी उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।