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बीएड कर रहे स्टूडेंट्स के लिए अहम खबर, 90 फीसदी कॉलेज अस्थाई

Mon, 02 May 2016 01:05 PM IST
विनीत तोमर/अमर उजाला, रोहतक।
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रिकार्ड कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे हैं - फोटो : Demo pic
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प्रदेश में चल रहे बीएड कॉलेज भले ही संसाधन और जरूरी मानक पूरे करने का दावा कर रहे हों, लेकिन रिकार्ड कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे हैं। हालात ये हैं कि प्रदेश के 90 फीसदी कॉलेज अस्थायी मान्यता के सहारे चल रहे हैं, जबकि मात्र दस फीसदी कॉलेजों के पास स्थायी मान्यता है। अस्थायी मान्यता की पटरी पर दौड़ रहे इन कॉलेजों में विद्यार्थियों का भविष्य कितना सुरक्षित होगा, यह बताने की जरूरत नहीं है।
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सरकार ने प्रदेश के सभी 524 बीएड कॉलेज एमडीयू, कुरुक्षेत्र और सिरसा यूनिवर्सिटी से लेकर जींद यूनिवर्सिटी के हवाले कर दिए हैं। इसके बाद से घमासान मचा है। अमर उजाला ने जब इन कॉलेजों की मान्यता को गहराई से जांचा तो बड़ा खुलासा हुआ। मालूम चला है कि प्रदेश में चल रहे बीएड कॉलेजों में से केवल 10 फीसदी के पास ही स्थायी मान्यता है, जबकि 90 फीसदी कॉलेजों की डोर अस्थायी मान्यता से बंधी है। एमडीयू के तहत 327 बीएड कॉलेज आते हैं, जिसमें से केवल दर्जन भर कॉलेजों के पास स्थायी मान्यता है। खास बात यह है कि एमडीयू में पिछले दो वर्षों से एक भी कॉलेज ने स्थायी मान्यता नहीं ली। 

ये भी कारण : स्थायी मान्यता के कड़े नियम, खर्च भी मोटा
स्थायी मान्यता के लिए बीएड कॉलेजों को सभी नियम पूरे करने होते हैं। मसलन, कॉलेज के पास सभी फैकल्टी रेगुलर होनी चाहिए। कॉलेज की बिल्डिंग से लेकर संसाधन तक नियम के अनुसार होने चाहिए। इन नियमों को पूरा करने के लिए कॉलेज का काफी बजट खर्च हो जाता है। पूरी प्रक्रिया के बाद यूनिवर्सिटी की टीम कॉलेज का निरीक्षण करती है। निरीक्षण में सब ठीक मिलने के बाद करीब तीन लाख की फीस जमा करनी होती है। इसे बाद विश्वविद्यालय से स्थायी मान्यता मिलती है। यूनिवर्सिटी की टीम को हर तीन साल बाद भी निरीक्षण करना होता है। 
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हर साल रिन्यू होती है अस्थायी मान्यता

ऐसे कॉलेजों के लिए नए नियम लागू - फोटो : Demo pic
तमाम झंझटों से बचने के लिए कॉलेजों ने अलग फंडा अपना रखा है। दरअसल, यूनिवर्सिटी को हर साल लगभग पचास हजार रुपये की फीस जमा कराते हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी नियमों में कुछ छूट दे देती है और एक साल के लिए कॉलेज को अस्थायी मान्यता मिल जाती है। जबकि स्थायी मान्यता वाले कॉलेज को यह फीस देने की जरूरत नहीं पड़ती। 

बड़ा सवाल
अब सभी कॉलेज जींद यूनिवर्सिटी के अधीन हो गए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या जींद यूनिवर्सिटी अस्थायी मान्यता वाले आधार पर चलती रहेगी या शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की तरफ ऐसे कॉलेजों के लिए नए नियम लागू करेगी। 

वर्जन 
यूनिवर्सिटी के अधीन आने वाले अधिकतर बीएड कॉलेज अस्थायी मान्यता के सहारे चल रहे हैं। दर्जनभर कॉलेजों के पास ही स्थायी मान्यता है। स्थायी मान्यता के लिए नियम-कायदे कड़े हैं। उन्हें पूरा करने पर ही किसी कॉलेज को स्थायी मान्यता दी जाती है।
- प्रो. सेवा सिंह दहिया, डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल, एमडीयू।
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