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अगर कर दी ये गलती तो नहीं मिलेगा प्राइवेट स्कूल में दाखिला, फ्री पढ़ने का मौका है

Sun, 09 Apr 2017 02:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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दाख‌िला प्रक्र‌िया शुरु
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अगर आप अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूल में फ्री में पढ़ाना चाहते हैं और दाखिला लेते हुए कर दी ये गलती तो पछताना पड़ सकता है। दरअसल, नियम 134 ए के तहत हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों में दाखिले दिए जा रहे हैं। दाखिले के लिए 10 अप्रैल तक आवेदन किए जा सकते हैं।
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ऐसे में हरियाणा में मौजूदा शिक्षा सत्र के तहत शिक्षा नियमावली 134-ए के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पसंदीदा स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए अभिभावकों व छात्रों की कसरत जारी है। इसके लिए छात्रों को अपने अभिभावकों की आय का प्रमाण पत्र तहसील कार्यालयों से बनवाकर आवेदन पत्र केसाथ 10 अप्रैल तक सभी जिलों के खंड शिक्षा कार्यालयों में जमा करवाने है। ले

किन इस सारी प्रक्रिया में सरकार के पास कुछ ऐसी शिकायतें पहुंच रही हैं, जिसे लेकर हरियाणा सरकार पूरी तरह से गंभीर हो गई है। इसी के चलते हरियाणा के मुख्य सचिव ने सभी जिलों के डीसी को पत्र भेजकर उन्हे इस बाबत गंभीरता से जांच करवाने के निर्देश दिए हैं। ये शिकायत दाखिला संबंधी आवेदन पत्र भरते समय अभिभावकों द्वारा गलत सूचनाएं देने और गलत जानकारी के  आधार पर झूठा आय सर्टिफिकेट दिए जाने से संबंधित है।
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वहीं मौलिक शिक्षा विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ. वंदना दिसौदिया ने बताया कि एक बार बच्चे का किसी स्कूल में दाखिला हुआ तो वह उसी में फाइनल कक्षा तक पढ़ने का हकदार होगा। सोनीपत के डीसी केएम पांडूरंग ने शिक्षा विभाग में पत्र लिखकर नियमों पर स्पष्टीकरण मांगा था।

इस तरह रहेगी सरकार की सख्ती

दाख‌िला प्रक्र‌िया शुरु
सरकार की ओर से सभी जिला उपायुक्तों को भेजे पत्र में कहा गया है कि इस बाबत कई शिकायतें सरकार को पहुंच रही है कि 134-ए के अंतर्गत दाखिले के लिए आवेदन पत्र के साथ जमा करवाए जा रहे तहसील कार्यालयों से जारी आय प्रमाण पत्रों को गलत जानकारी के आधार पर बनवाया जा रहा है।

दरअसल, शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत उन छात्रों को ही दाखिला दिया जाएगा, जो बीपीएल परिवार से संबंधित है या जिनकी परिवार की आय 2 लाख या इससे कम है। इन्हे आर्थिक कमजोर परिवार माना जाएगा।

ऐसे में अभिभावक तहसील कार्यालयों से गलत जानकारी के आधार पर अपना आर्थिक कमजोर संबंधी प्रमाण पत्र जारी करवा आवेदन पत्र के साथ संलग्न कर खंड शिक्षा कार्यालयों में जमा करवा रहे हैं।

इसलिए मुख्य सचिव ने सभी डीसी को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिलों में रेंडम सैंपलिंग तकनीक से कम से कम 50 संदेहास्पद सर्टिफिकेट  छांटकर उसकी वेरिफिकेशन अतिरिक्त जिला उपायुक्तों से करवाएं। उसके बाद इसकी रिपोर्ट 25 अप्रैल तक सरकार को भेज दें। ताकि इस मामले में आगामी एक्शन लिया जा सके।

इसके अतिरिक्त अभिभावकों से भी खंड शिक्षा कार्यालय में आवेदन पत्र भरते समय ये अंडरटेकिंग ली जाएगी कि यदि उनके आवेदन पत्र में जांच के दौरान कोई भी जानकारी गलत पाई गई तो उनके बच्चों का दाखिला तुरंत रद कर दिया जाएगा।
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सरकारी फीस स्ट्रक्चर पर होता है दाखिला

दाख‌िला प्रक्र‌िया शुरु
उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत शिक्षा नियमावली 134-ए के अंतर्गत बीपीएल परिवार और आर्थिक कमजोर वर्ग के छात्रों को सरकार उनके पसंदीदा प्राइवेट स्कूलों में सरकारी फीस स्ट्रेक्चर पर दाखिला दिलवाती है।

सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में पहली से दसवीं तक हर कक्षा के कुछ छात्र संख्या का दस फीसदी सीट 134-ए के तहत दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए तय की गई है। अब चूंकि सरकारी फीस स्ट्रक्चर में पहली से आठवीं कक्षा तक सभी छात्रों की फीस माफ है, उसके बाद नौंवीं और दसवीं कक्षा में फीस 25 रुपये मासिक है, ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में कला संकाय विषय की फीस 50 रुपये मासिक व कामर्स और साइंस संकाय की फीस 75 रुपये हैं।

इसलिए प्राइवेट स्कूलों में भी आर्थिक कमजोर छात्रों को यही फीस देनी होती है, इसलिए इन स्कूलों में दाखिले के लिए होड़ मची रहती है। दाखिला के लिए आवेदन 10 अप्रैल तक जमा करवाने हैं।
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