बहरहाल, सवाल यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) नए कर्जदार को कर्ज देते समय उतने चातुर्य का परिचय क्यों नहीं देते, जितने की उनके हितों की रक्षा के लिए हमें उम्मीद होती है? कई निजी बैंक ऐसी स्थितियों में ऋण को इक्विटी में परिवर्तित करने और पूंजीगत मूल्य वृद्धि से लाभ पाने पर जोर देते हैं।
रुचि सोया के मामले में पतंजलि द्वारा कंपनी का अधिग्रहण करने के बाद से शेयर की कीमत लगभग 3.50 रुपये से बढ़कर 1,535 रुपये हो गई, जो 43,757.14 गुना अधिक थी। पुणे स्थित सजग नागरिक मंच के अध्यक्ष और बैंक के एक शेयरधारक विवेक वेलंकर ने बताया कि एसबीआई ओर से साझा किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि मार्च 2020 तक रुचि सोया से पूरी तरह से कोई रिकवरी नहीं हुई है।
वैसे तकनीकी रूप से जब खाते में कर्ज लिखे जाते हैं, तो उन्हें बैलेंस शीट से संपत्ति के रूप में हटा दिया जाता है, क्योंकि बैंक कर्जों की वसूली की उम्मीद नहीं करता है। यह अभ्यास विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है, लेकिन बैंकों द्वारा नियमित रूप से कर प्रबंधन के तौर पर इस तरह की प्रक्रिा को अपनाया जाता है।
सितंबर 2019 में नियामक को दी गई जानकारी में रुचि सोया ने कहा था कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने पतंजलि की 4,350 करोड़ रुपये की संकल्प योजना को मंजूरी दे दी है। आदेश में कहा गया थ कि पतंजलि एक एसपीवी के तहत पतंजलि कंसोर्टियम अधीग्रह के नाम से 4,350 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग करेगी, जिसे बाद में रुचि सोया के साथ समायोजित किया जाएगा।