म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिसको देखते हुए म्यूचुअल फंड हाउस नए प्रोडक्ट पेश करने में जुट गईं हैं। हालांकि नए फंड लगातार निवेशकों की जरूरतों के अनुसार पेश किए जाते रहे हैं, लेकिन जिस तरह से म्यूचुअल फंड में प्रवाहिता छोटे शहरों से आ रही है साथ युवा वर्ग जो रिस्क लेने के लिए तैयार है, उसको टार्गेट करते हुए कंपनियां नए उत्पादों को पेश कर रही है। जानकारों का कहना है कि इस पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की नजर बनी हुई है और वह निवेशकों के लिए किसी स्कीम के लिए एक्चुअल रिटर्न के साथ रिस्क एडजेस्टड रिटर्न (आरएआर) के बारे में डिस्क्लोजर को आवश्यक बना सकती है। इससे निवेशकों को निवेश करते समय यह जानकारी मिल सकेंगी कि उसका निवेशक कहां हो रहा है और कितना रिस्क रिटर्न मिल सकता है।
निवेशकों कों निर्णय लेने में होगी आसानी
एक्सिस सिक्यूरटीज के विशेषज्ञ का कहना है कि यदि सेबी इस तरह का डिस्क्लोजर आवश्यक बनता है तो, निवेशकों को अपने निवेश के बारे में जानकारी तो मिलेगी साथ ही उन्हें यह निर्णय लेने में आसानी होगी कि वह किस फंड में निवेश करे अथवा नहीं करे। इस तरह के नियम आने से फंड हाउस को निवेशकों को उनके निवेश और जिस फंड में निवेश किया है उसकी जानकारी देनी होगी। इसको लेकर सेबी ने सुझाव मांगे थे। फिलहाल यह सुविधा अभी निवेशकों के पास नहीं है। मौजूदा समय में म्यूचुलअ फंड को निकालने के तरीके अलग है।
हाल ही में श्रीमराम म्यूचुअल फंड ने निफ्टी 1डी रेट लिक्वड ईटीएफ लॉन्च किया है। वहीं एडलवाइस म्यूचुअल फंड ने बिजनेस साइकिल फंड पेश किया है। यह उत्पाद व्यापार चक्र की निवेश थीम पर आधारित है। इसी तरह से कई अन्य फंड हाउस ने अतिरिक्त रिटर्न वाले प्रोडक्ट बाजार में पेश किए हैं। हाल ही क्वांट जैसी घटनाओं ने निवेशकों को पेरशानी हुई थी। निवेशकों हितों की रक्षा करने के लिए रेग्यूलेटर लगातार बाजार में पेश होने वाले नए उत्पादों पर नजर बनाए हुए है।