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रिपोर्ट : आईपीओ और लाभांश पर कितना टैक्स देना होगा, समझें पूरा गणित 

Mon, 06 Sep 2021 08:46 AM IST
Kuldeep Singh बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आयकर विभाग आईपीओ में निवेश और लाभांश दोनों तरह की कमाई पर टैक्स की गणना अलग तरीके से करता है। आईपीओ और लाभांश पर कितना टैक्स देना होगा, पूरा गणित बताती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
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IPO - फोटो : pixabay
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विस्तार
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शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों ने बाजार में जारी तेजी का जमकर लाभ उठाया है। उन्होंने नए-नए आईपीओ में निवेश कर पैसे बनाएं, तो कंपनियों ने भी लाभांश के रूप में जमकर भुगतान किया। आयकर विभाग इन दोनों तरह की कमाई पर टैक्स की गणना अलग तरीके से करता है। आईपीओ और लाभांश पर कितना टैक्स देना होगा, पूरा गणित बताती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट- 

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आईपीओ सूचीबद्ध होने के बाद लगेगा टैक्स
निवेश पोर्टल के सीओओ हर्ष जैन का कहना है कि आईपीओ सूचीबद्ध होने के बाद ही मुनाफे पर आयकर गणना होती है। सूचीबद्ध होने के 12 महीने के भीतर आईपीओ में आवंटित शेयरों को बेचकर मुनाफा कमाया है, तो लघु अवधि का पूंजीगत लाभ कर (एसटीसीजी टैक्स) देना होगा।

यह कुल मुनाफे का 15 फीसदी होगा। इस पर 4 फ़ीसदी उपकर के रूप में टैक्स देना होगा। सूचीबद्ध होने के 12 महीने बाद आईपीओ के शेयरों को बेचकर मुनाफा कमाया है, तो लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ कर एलटीसीजी टैक्स देना पड़ेगा। जो 10 फ़ीसदी की दर से लगेगा। एक लाख से ज्यादा का मुनाफा कमाने पर ही एलटीसीजी टैक्स देना पड़ता है।
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जानें कितना बढ़ेगा बोझ
अगर आपने 1,000 रुपये के भाव से आईपीओ में 14 शेयर खरीदे और 12 महीने के भीतर इसे 1,580 प्रति इकाई के भाव पर बेच दिया। इस पर 8,120 रुपये का एसटीसीजी मिलेगा और 15 फ़ीसदी की दर से टैक्स चुकाना होगा। कुल मुनाफे पर 1,218 रुपये टैक्स बनेगा। जिस पर 4 फ़ीसदी यानी 48.72 रुपये उपकर देना होगा और कुल टैक्स देनदारी करीब 1,270 रुपये होगी। अगर 12 महीने के बाद बेचा तो मुनाफे पर सीधे 10 फ़ीसदी टैक्स लगेगा।

घाटे की भरपाई भी 
आईपीओ का चुनाव गलत हो गया है और सूचीबद्ध होने के बाद शेयरों के भाव नीचे चले गए, तो इस घाटे को अन्य शेयरों के मुनाफे के साथ समायोजित भी किया जा सकता है। मसलन, लघु अवधि में बेचे शेयरों पर घाटा हुआ तो इसी अवधि में यह 1 साल पहले बेचे अन्य शेयरों के मुनाफे को समायोजित कर टैक्स देनदारी से बचा जा सकता है।
हालांकि आयकर विभाग लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर इसकी भरपाई की सुविधा नहीं देता है।

लाभांश पर देना पड़ता है दोहरा टैक्स 

पिछले वित्त वर्ष से पहले एक लाभांश देने वाली कंपनियां ही इस पर टैक्स चुकाती थी। लेकिन सरकार ने इसे निवेशकों कि आय मानते हुए उनके स्लैब के हिसाब से टैक्स गणना शुरू कर दी है।

वित्त वर्ष 2020-21 का रिटर्न दाखिल करते समय लाभांश के रूप में हुई कमाई को भी ध्यान में रखना होगा और सालाना 5,000 रुपये से ज्यादा लाभांश मिलता है, तो इस पर 7.5 फीसदी दर से टीडीएस काटा जाएगा। शेष बची राशि ही निवेशकों के खाते में जाएगी, जिसे उसकी आय माना जाएगा। आयकर विभाग दोबारा इस राशि पर करदाता के स्लैब के हिसाब से टैक्स वसूलेगा।
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टीडीएस नहीं कटेगा, तो भी देना होगा टैक्स

वित्त वर्ष में लाभांश की रकम 5,000 से कम है तो उस पर टीडीएस नहीं कटता है। टीडीएस नहीं कटता है तो भी लाभांश के रूप में मिली रकम आपकी आय में जुड़ती है और स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।

कितना लगेगा टैक्स 
10 फीसदी स्लैब वाले करदाताओं को 4,500 रुपये लाभांश मिला, तो टीडीएस नहीं कटेगा। स्लैब के हिसाब से 450 रुपये टैक्स बनेगा। लाभांश 6,000 रुपये है तो 7.5 फीसदी टीडीएस कटकर 5,550 रुपये मिलेंगे। जो आय में जुड़ेंगे और 10 फ़ीसदी के हिसाब से 555 रुपये टैक्स देना पड़ेगा।

रिटर्न फॉर्म में बरतें सावधानी 
आयकर रिटर्न भरते समय करदाताओं को इस बार काफी सावधानी बरतनी पड़ेगी। लाभांश की रकम 2020-21 से पहली बार करदाताओं की आय में जुड़ी है। लिहाजा कर छूट का दावा करते समय अपनी सभी तरह की आय का खुलासा करना बेहद जरूरी होगा। - अतुल गर्ग, कर विशेषज्ञ
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