पिछले वित्त वर्ष से पहले एक लाभांश देने वाली कंपनियां ही इस पर टैक्स चुकाती थी। लेकिन सरकार ने इसे निवेशकों कि आय मानते हुए उनके स्लैब के हिसाब से टैक्स गणना शुरू कर दी है।
वित्त वर्ष 2020-21 का रिटर्न दाखिल करते समय लाभांश के रूप में हुई कमाई को भी ध्यान में रखना होगा और सालाना 5,000 रुपये से ज्यादा लाभांश मिलता है, तो इस पर 7.5 फीसदी दर से टीडीएस काटा जाएगा। शेष बची राशि ही निवेशकों के खाते में जाएगी, जिसे उसकी आय माना जाएगा। आयकर विभाग दोबारा इस राशि पर करदाता के स्लैब के हिसाब से टैक्स वसूलेगा।
वित्त वर्ष में लाभांश की रकम 5,000 से कम है तो उस पर टीडीएस नहीं कटता है। टीडीएस नहीं कटता है तो भी लाभांश के रूप में मिली रकम आपकी आय में जुड़ती है और स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।
कितना लगेगा टैक्स
10 फीसदी स्लैब वाले करदाताओं को 4,500 रुपये लाभांश मिला, तो टीडीएस नहीं कटेगा। स्लैब के हिसाब से 450 रुपये टैक्स बनेगा। लाभांश 6,000 रुपये है तो 7.5 फीसदी टीडीएस कटकर 5,550 रुपये मिलेंगे। जो आय में जुड़ेंगे और 10 फ़ीसदी के हिसाब से 555 रुपये टैक्स देना पड़ेगा।
रिटर्न फॉर्म में बरतें सावधानी
आयकर रिटर्न भरते समय करदाताओं को इस बार काफी सावधानी बरतनी पड़ेगी। लाभांश की रकम 2020-21 से पहली बार करदाताओं की आय में जुड़ी है। लिहाजा कर छूट का दावा करते समय अपनी सभी तरह की आय का खुलासा करना बेहद जरूरी होगा। - अतुल गर्ग, कर विशेषज्ञ