हेल्थ इंश्योरेंस उत्पाद आने वाले दिनों में कहीं ज्यादा सरल और पारदर्शिता के साथ आपको मिलेंगे। ऐसे में जहां आपको उत्पाद खरीदते वक्त कम से कम दुविधा का सामना करना पड़ेगा वहीं, क्लेम लेते समय भी कंपनियों की मनमानी का कम सामना करना पड़ेगा।
ऐसा बीमा नियामक इरडा द्वारा स्वास्थ्य बीमा के मानकीकरण करने से होने वाला है। जिसे कंपनियों को ग्रुप इंश्योरेंस के लिए जुलाई से और व्यक्तिगत बीमा के लिए अक्टूबर 2013 से लागू करना है।
निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य बीमा देने वाली कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई गाइडलाइन में इरडा ने स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में मानकीकरण करने के निर्देश दे रखे हैं।
इसके तहत गंभीर बीमारी तय करने, कमरे के किराया पर प्रीमियम कवर, डे-केयर इलाज के तहत बीमारी शामिल होगी या नहीं, इसी तरह इलाज देने वाला संस्थान हॉस्पिटल के दायरे में आएगा या नहीं, यह सब तय करने का अधिकार अब बीमा कंपनियों के पास नहीं रहेगा।
जिसके मद्देनजर नए नियमों के तहत एंट्री लेवल के उत्पाद सभी कंपनियों के करीब एक समान ही होंगे। ऐसे में कंपनियां केवल ऐड ऑन फीचर्स के जरिए उत्पादों में विभिन्नता ला सकेंगी। साथ ही प्रीमियम में भी उसी के जरिए अंतर आ सकेगा।
अधिकारी के अनुसार ऐसे में आने वाले दिनों में कंपनियों का जोर ऐड ऑन फीचर्स पर होगा।अभी कंपनियां डे-केयर में शामिल बीमारी की संख्या, गंभीर बीमारी कौन सी उत्पाद में कवर है उसके आधार पर और दूसरे सेवाओं के जरिए उत्पाद के फीचर्स और प्रीमियम तय करती है। नए नियमों के लागू होने के बाद कंपनियों को न्यूनतम मानक लागू करना अनिवार्य हो जाएगा।
नए मानकों के आधार पर कैंसर जनित बीमारी, पहला दिल का दौरा, कोरोनेरी आर्टरी बायपास ग्राफ्ट, दिल के वाल्व का प्रत्यारोपण या हृदय प्रत्यारोपण, मरीज का कोमा में चला जाना, दोनो गुर्दों का खराब हो जाना आदि 11 प्रमुख बीमारियों को शर्तों के आधार पर गंभीर श्रेणी में शामिल किया है।
इरडा ने इसी तरह आबादी के आधार पर अस्पताल में बिस्तरों की संख्या तय कर ही है। जिसके आधार अस्पताल का निर्धारण होगा। यानी यहां भी कंपनियों की मनमानी नही चलेगी।
इरडा ने हेल्थ सेक्टर में बीमा के लिए प्रयोग में होने वाले 46 विभिन्न शब्दावलियों को एक निश्चित परिभाषा के जरिए उनका मानकीकरण किया है। हालांकि इंडस्ट्री ने नए नियमों को लागू करने के लिए इरडा से मौजूदा तय सीमा में बढ़ोतरी करने की भी मांग की हुई है।