एजुकेशन लोन के लिए बनने वाले क्रेडिट गारंटी फंड को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार में आम सहमति बन गई है।
गारंटी फंड के तहत नए प्रस्ताव में अब बैंकों को विद्यार्थियों द्वारा लिए गए 7.5 लाख रुपये तक के कर्ज पर गारंटी मिलेगी, जिससे बैंक अब आसानी से विद्यार्थियों को एजुकेशन लोन दे सकेंगे।
केंद्र सरकार ने साल 2012-13 में क्रेडिट गारंटी फंड बनाने का प्रस्ताव किया था। पिछले एक साल से विभिन्न विभागों के बीच आम राय न बन पाने से एजुकेशन लोन के लिए क्रेडिट गारंटी फंड का रास्ता साफ नहीं हो पाया था।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि एजुकेशन लोन के लिए प्रस्तावित क्रेडिट गारंटी फंड के लिए सभी संबंधित विभाग सहमत हो गए हैं। इस मामले में अब कोई अड़चन नहीं रह गई है।
हाल ही में एक्सपेंडीचर फाइनेंस कमेटी ने भी फंड के लिए मंजूरी दे दी है। ऐसे में इसके अब जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। अधिकारी के अनुसार फंड के तहत सरकार 7.5 लाख रुपये के तक के कर्ज पर गारंटी देगी, जिसमें अधिकतम गारंटी की सीमा 75 फीसदी होगी।
इस कदम के बाद बैंक अब आसानी से विद्यार्थियों को कर्ज दे सकेंगे। अधिकारी ने बताया फंड के प्रावधान को लेकर योजना आयोग ने कुछ स्पष्टीकरण मांगा था, जिसकी वजह से फंड को कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। इसके अलावा गारंटी देने की सीमा को लेकर भी सहमति नहीं हो पाई थी।
मौजूदा एजुकेशन लोन स्कीम के तहत बैंक चार लाख रुपये तक के कर्ज पर विद्यार्थी से किसी तरह की कोई गारंटी नहीं लेते हैं। वहीं चार लाख से 7.50 लाख रुपये तक के कर्ज पर थर्ड पार्टी गारंटी यानी किसी तीसरे व्यक्ति से विद्यार्थी के कर्ज की गारंटी मांगते हैं।
जबकि 7.5 लाख रुपये से ज्यादा के कर्ज पर मूर्त गारंटी यानी कि जमीन, जायदाद के कागजात गारंटी के रुप में लेते हैं। बैंक अधिकारियों के अनुसार मौजूदा नियम में चार लाख रुपये तक के कर्ज पर बैंक कोई गारंटी नहीं लेते हैं, जिसकी वजह से इस वर्ग में डिफॉल्ट काफी बढ़ा है। अब 7.5 लाख रुपये तक गारंटी मिलने पर बैंकों के कर्ज सुरक्षित हो जाएंगे।