रुपए में गिरावट जहां अर्थव्यवस्था और बाजार को प्रभावित कर रही है, वहीं बैंकिंग सेक्टर पर भी इसका खासा बुरा असर देखने को मिल रहा है।
इसकी एक बानगी बैंकिंग शेयरों में म्यूचुअल फंडों के निवेश में भारी गिरावट के रूप में देखने को मिली है।
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के मुताबिक बैंकिंग शेयरों में म्यूचुअल फंडों का निवेश जुलाई में घटकर 28,862 करोड़ रुपए पर आ गया। यह 19 महीने का सबसे निचला स्तर रहा।
सेबी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के अंत तक म्यूचुअल फंडों का बैंकिंग शेयरों निवेश उनके 1.70 लाख करोड़ रुपए के कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) का महज 16.93 फीसदी रहा।
यह दिसंबर 2011 के बाद बैंकिंग शेयरों में म्यूचुअल फंडों का सबसे कम निवेश है। दिसंबर 2011 में यह 26,335 करोड़ रुपए के स्तर पर था।
इसके विपरीत दिसंबर में बैंकिंग शेयरों में फंडों का निवेश उछल कर अपने उच्चतम स्तर 43,659 करोड़ रुपए पर पहुंच गया था।
बैंकिंग शेयरों के प्रति फंड हाउसों के घटते रुझान की वजह शेयर बाजार में कई महीनों से जारी अस्थिरता के साथ-साथ बैंकों पर नकदी का दबाव और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से उठाए गए मौद्रिक सख्ती के कदम रहे।
इन कारकों के चलते इक्विटी बाजार में बैंकिंग सेक्टर के शेयर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं और कई महीनों से उनपर बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
जुलाई 2013 में जहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के संवेदी सूचकांक में 1.2 फीसदी की गिरावट रही वहीं बैंकिंग सेक्टर से जुड़े बीएसई के बैंकेक्स सूचकांक की गिरावट इसके 10 गुने से भी ज्यादा 14 फीसदी पर रही।
बाजार के विभिन्न सेक्टरों में से म्यूचुअल फंडों का सबसे ज्यादा 22,009 करोड़ रुपए या 12.91 फीसदी निवेश सॉफ्टवेयर, फार्मा 13,997 करोड़ (8.21 फीसदी), कंज्यूमर नॉन ड्यूरेबल्स 13,258 करोड़ (7.78 फीसदी), पेट्रोलियम 9,979 करोड़ रुपए (5.85 फीसदी) के स्तर पर रहा।
इससे पहले की बात करें तो 2012 में बैंकिंग सेक्टर भी फंडों के पसंदीदा सेक्टरों में शामिल था। इस समय लोन की सस्ती ब्याज दरों के चलते बैंकिंग सेक्टर में तेजी का दौर चल रहा था।