कोरोना वायरस माहामारी से न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया में बहुत कुछ बदला है। कंपनियों के काम करने के तरीके से लेकर लोगों द्वारा जरूरी कामों के लिए डिजिटल माध्यमों को अपनाने तक संकट के दौर में काफी बदलाव देखने को मिले हैं। इस दौरान लोगों ने बचत और स्वास्थ्य बीमा का महत्व भी समझा है। कंपनियों और वित्तीय विशेषज्ञों ने कहा है कि लोग अब स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए पैसों की बचत कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना काल में भारतीय आपात स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए फंड्स का उपयोग कर रहे हैं।
आपातकालीन जरूरतों के लिए नकदी जमा कर रहे भारतीय
दोनों शहरी और ग्रामीण इलाकों में भारतीय उपभोक्ता आपातकालीन चिकित्सा जरूरतों के लिए नकदी जमा कर रहे हैं। कोरोना काल में कई लोगों की नौकरी गई है। वहीं कुछ कंपनियों ने कर्मचारियों के वेतन में कटौती की है। महामारी को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान लोगों को और भी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसलिए लोग अब चिकित्सा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बचत कर रहे हैं।
आधे से अधिक खाताधारकों ने निकाला PF का पैसा
इस बीच करोड़ों लोगों को अपने प्रोविडेंट फंड (पीएफ) का पैसा भी निकाला है। एक अप्रैल 2020 से अब तक 3.5 करोड़ लोगों ने अपने पीएफ खाते से कुल मिलाकर 1.25 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। वित्त वर्ष 2019 में ईपीएफओ ने करीब 1.63 करोड़ खाताधारकों के 81,200 करोड़ रुपये के क्लेम सेटल किए थे।
स्वास्थ्य बीमा की ओर बढ़ रही रुचि
महामारी के दौर में भारतीय अपने और परिवार की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य बीमा भी ले रहे हैं। इससे न सिर्फ अस्पतालों के भारी-भरकम खर्च से राहत मिलेगी, बल्कि आप पर वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा। इसलिए अपने और अपने परिवार के इमरजेंसी मेडिकल खर्चों को कवर करने के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा और महत्वपूर्ण बीमा योजनाएं खरीदना सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय कदम है।