यदि आप अपनी बचत पर अधिक ब्याज कमाना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) योजनाओं में निवेश एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। देश में बैंक मुख्य रूप से दो तरह के डिपॉजिट खाते ऑफर करते हैं। करंट या सेविंग खाता डिमांड डिपॉजिट्स कहलाते हैं जबकि फिक्स्ड या रेकरिंग डिपॉजिट्स को टर्म डिपॉजिट्स कहा जाता है। सेविंग अकाउंट बार-बार की जरूरतों के लिए खुलवाया जाता है तो फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी के तहत जमा धन को एक निश्चित समय तक छोड़ना पड़ता है। इस अवधि में बैंक जमा रकम पर ब्याज देता है।
एफडी की अवधि पूरी होने तक आपको वही ब्याज दर मिलेगा जो एफडी खुलवाते वक्त था। भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) ब्याज दरों में कटौती करे, या उसे बढ़ाए, इसका एफडी पर कोई असर नहीं पड़ता। केवल नई खोले जाने वाली एफडी और टेनयोर पूरा होने के बाद एफडी रिन्युअल पर ही ब्याज दर में बदलाव होता है। मौजूदा एफडी धारकों को इससे किसी भी तरह का फायदा या नुकसान नहीं होता।
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लोग ज्यादातर एफडी छह महीने, एक साल या दो साल के हिसाब से कराते हैं। लेकिन बैंकों में आप एक दिन की एफडी भी करवा सकते हैं। ध्यान रहे कि अलग-अलग अवधि के लिए ब्याज दर अलग-अलग होता है। इसलिए किसी भी बैंक में एफडी खुलवाने से पहले आपको उसकी अवधि और ब्याज दर को देख लेना चाहिए।
बैंक एफडी की मैच्योरिटी पीरियड से पहले उसे तुड़वाने या पैसे निकालने की भी सुविधा देते हैं। जरूरत पर धारक अपनी एफडी तुड़वा सकते हैं। हालांकि इसके लिए बैंक प्री-मैच्योरिटी चार्ज भी वसूलते हैं।
बैंक द्वारा आपको एफडी के ऊपर लोन की भी सुविधा मिलती है। इससे आपको जरूरत के समय पैसे भी मिल जाएंगे। भारतीय स्टेट बैंक ( SBI ) एफडी पर एफडी अमाउंट के 90 फीसदी तक का लोन उपलब्ध कराता है। लोन की राशि 25,000 रुपये से पांच करोड़ रुपये तक है।
सभी बैंक एफडी में वरिष्ठ नागरिकों को खास सुविधा देते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर सामान्य से ज्यादा होती है। अधिकतर बैंक वरिष्ठ नागरिकों को 0.50 फीसदी अधिक ब्याज देते हैं।