बैंकों के डूबे हुए कर्ज यानी 'बैड डेब्ट्स' को कम करने के लिए बुधवार को कैबिनेट ने एक अध्यादेश का सुझाव दिया जिससे भारतीय रिजर्व बैंक प्रमुख ऋण बकाएदारों को खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगा। इस अध्यादेश को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी मिल गई है और जल्द ही इसकी विसतृत जानकारी सामने आएगी। इस पैकेज को सरकार, आरबीआई और बैकों की बीच हुई बातचीत के बाद बनाया गया है।
सूत्रों का कहना है कि इस अध्यादेश के लागू हो जाने के बाद आरबीआई का कद बढ़ जाएगा और वो विशेष अधिकार के साथ नियामक बन जाएगा। इसके साथ ही सरकार चुनिंदा मसलों में ही आरबीआई को सलाह देगी।
गौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्रों के पास 6 लाख करोड़ रुपये के नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) हैं, जिसके उनके प्रदर्शन पर खासा असर पड़ा है। हालांकि, सरकार ने पहले भी कोशिश की थी, मगर वो कदम नाकाफी साबित हुए। बैंक सैटलमेंट पैकेज पर ध्यान नहीं देना चाहते थे क्योंकि उन्हें सीवीस और सीएजी की रिपोर्ट में खराब नंबर मिलने का डर था, जिसके बाद सीबीआई जांच भी हो सकती है।