अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को ढाई साल के शीर्ष पर पहुंच गईं। सुबह के कारोबार में ब्रेंट क्रूड 76.60 डॉलर प्रति बैरल बिका, जो बाद में फिसलकर 75.98 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
ऑयल ब्रोकर पीवीएम के विश्लेषक स्टीफन ब्रेनॉक का कहना है कि संक्रमण में सुधार, तेज टीकाकरण और गर्मी के मौसम में ईंधन की बढ़ती मांग को देखते हुए आगे भी कीमतों में इजाफा हो सकता है। ब्रेंट क्रूड में लगातार पांचवें महीने तेजी आई और कीमतें अक्तूबर, 2018 के बाद सबसे ज्यादा रहीं।
हालांकि, अमेरिकी क्रूड 73.95 डॉलर प्रति बैरल के भाव बिक रहा है। तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) व अन्य सहयोगी देशों ने उत्पादन में कटौती की, जिसकी वजह से कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि, ओपेक ने मई से जुलाई तक 21 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाने की बात कही थी, ताकि कीमतें काबू में रहें।
जुलाई से राहत की उम्मीद
वैश्विक क्रूड ब्रोकर एएनजी व आईएनजी ने उम्मीद जताई है कि 1 जुलाई को ओपेक व अन्य सहयोगी देशों की होने वाली बैठक में तेल उत्पादन बढ़ाने पर फैसला हो सकता है। अगस्त से इसमें 5 लाख बैरल प्रतिदिन इजाफे की उम्मीद है। इस फैसले से क्रूड के भाव नीचे लाने में मदद मिलेगी।