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Vivo ED Raid: वीवो के निदेशक पिछले साल ही भाग गए थे भारत छोड़कर, अब चीन बोला- हमने हमेशा कानून मानने को कहा 

Thu, 07 Jul 2022 06:42 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वीवो मोबाइल कम्यूनिकेशंस (Vivo Mobile Communications) की भारत स्थित कंपनियां चीन की अन्य फर्मों की जांच के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भारतीय एजेंसियों के रडार पर आ गई थी। कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय भी कंपनी की वित्तीय मामलों में अनियमितता को लेकर सतर्क था।
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vivo v17 pro - फोटो : vivo
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विस्तार
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भारत में प्रचलित मोबाइल ब्रांड वीवो के निदेशक झेंगशेन ओउ और झां जी भारत छोड़कर पिछले साल ही भाग गए  थे। यह जानकारी गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जारी की गई है। ईडी के अधिकारियों की ओर से यह जानकारी मीडिया में उन खबरों के आने के बाद दी गई हैं जिनमें कहा गया था कि मोबाइल निर्माता कंपनी के निदेशक ईडी (Enforcement Directorate) की कार्रवाई शुरू होने के बाद देश छोड़कर भाग गए हैं। 

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आपको बता दें कि ईडी ने बीते 5 जुलाई को देशभर में वीवो कंपनी के 40 ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी की यह कार्रवाई पीएमएलए (Prevention of Money Laundering Act) के तहत की गई थी। ईडी एक अधिकारी ने नाम नाम छापने की शर्त पर समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि झेंगशेंग आउ और झेंग जी मोबाइल निर्माता कंपनी वीवो से जुड़े फर्म GPICL के निदेशक थे और वे पिछले साल ही देश छोड़कर भाग चुके हैं। आपको बता दें कि बीते 5 जुलाई को स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वीवो के देशभर के 44 ठिकानों पर मनी लाउंडरिंग के मामले में ईडी ने छापेमारी की थी। 

सीबीआई भी कर रही है कंपनी के खिलाफ कार्रवाई 

वीवो कंपनी के खिलाफ पीएमएलए  (Prevention of Money Laundering Act) के उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई की गई है। ईडी ने कार्रवाई करते हुए कंपनी के दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मेघालय और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में स्थित ठिकानों पर छापेमारी की है। आपको बता दें कि चाइनीज मोबाइल निर्माता कंपनी वीवो के खिलाफ सीबीआई पहले से ही कार्रवाई कर रही है। आयकर विभाग और कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय भी चायनीज मोबाइल निर्माता कंपनियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है। वीवो के खिलाफ की गई ईडी कार्रवाई पूर्व से ही कंपनी के खिलाफ चल रहे जांच का विस्तार है।
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भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर थी चायनीज कंपनी 

सूत्रों के अनुसार वीवो मोबाइल कम्यूनिकेशंस की भारत स्थित कंपनियां चीन की अन्य फर्मों की जांच के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भारतीय एजेंसियों के रडार पर आ गई थी। कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय भी कंपनी की वित्तीय मामलों में अनियमितता को लेकर सतर्क था। इसी साल अप्रैल में मंत्रालय की ओर से वीवो कंपनी के खिलाफ स्वामित्व और वित्तीय रिपोर्टिंग में अनियमितताओं की जांच करने को कहा गया था।  

चीन का विदेश मंत्रालय बोला- हमने अपनी कंपनियों को हमेशा कानूनों का पालन करने को कहा  

वहीं, अब चीन की कंपनी वीवो के खिलाफ ईडी की कार्रवाई के बाद अब चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से भी इस मामले में बयान जारी किया गया है। चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वे परे घटना क्रम पर नजर बनाए हुए हैं। चीन की सरकार ने हमेशा चीनी कंपनियों को विदेशों में व्यापार करते समय कानूनों और विनियमों का पालन करने के लिए कहा है। हम चीनी कंपनियों को उनके वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करने में दृढ़ता से सहयोग भी करते हैं।
 



चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा है कि हमें उम्मीद है कि भारतीय एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से मामले की जांच करेगी क्योंकि वे जांच और प्रवर्तन गतिविधियों को अंजाम देते हुए भारत में निवेश और संचालन करने वाली चीनी कंपनियों को निष्पक्ष, न्यायसंगत और गैर-भेदभावपूर्ण कारोबारी माहौल प्रदान करते हैं।

वीवो का एक पूर्व निदेशक 2018 में ही देश छोड़कर चला गया था 

ईडी ने गुरुवार को कहा है कि चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वीवो की भारतीय इकाई ने अपने टर्नओवर का लगभग 50 प्रतिशत, जो कि 62,476 करोड़ रुपये है, भारत मे करों का भुगतान करने से बचने के लिए चीन भेज दिया था। 

जांच एजेंसी ने कहा है कि बीते 5 जुलाई को देशभर में वीवो कंपनी और उससे जुड़ी 23 एसोसिएट कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान  119 बैंक खातों में पड़े 465 करोड़ रुपए, 73 लाख रुपए नकद और 2 किलोगाम के सोने के बिस्किट जब्त किए हैं। 

एजेंसी ने यह भी बताया है कि कंपनी का एक पूर्व निदेशक बिन लाऊ साल 2018 में भारत में वीवो की अलग-अलग कई कंपनियां बनने के बाद ही देश छोड़कर चला गया था। यही कंपनियां फिलहाल जांच के दायरे में हैं।  

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