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ये हैं 10 दमदार महिलाएं, इनके कदम चूमती है कामयाबी

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यूं तो महिलाएं हर क्षेत्र में कामयाबी के झंडे गाड़ रही हैं। वे किसी भी मामले में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। आज हम आपको बता रहे हैं उन दस महिलाओं के बारे में जिन्होंने आंत्रप्रेन्योरशिप यानि उद्यमशीलता में नया आसमान गढ़ा है।
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अजैता शाह ‘फ्रंटियर मार्केट्स’ की संस्थापक हैं। यह मार्केटिंग कंपनी भारत के निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए सस्ते सोलर सॉल्यूशन उपलब्ध कराने, बिक्री करने और सर्विस मुहैया कराने का काम करती है।

‘सोलर सहेली’ अभियान के जरिए वह गांवों की महिलाओं को उद्यम करना सिखा रही हैं और राजस्थान के गांवों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही हैं।

अजैता 2006 में ‘क्लिंटन सर्विस कॉर्प फेलो’, 2012 में ‘इकोइंग ग्रीन फेलो’, 2013 में ‘कोर्ड्स फेलो’ रह चुकी हैं। उन्होंने अंडर-30 कैटेगरी में माइक्रोफाइनेंस का सबसे प्रभावी पुरस्कार मिल चुका है। ‘बिजनेस वीक’ ने अपने 30 अंडर 30 में और ‘फोर्ब्स पत्रिका’ ने साल का टॉप 30 अंडर 30 सोशल आंत्रप्रिन्योर में अजैता को शामिल किया है।
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अंजली नोरोन्हा

दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स से 1982 में एमए करते हुए ही अंजली नोरोन्हा स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए बन रहे समूह ‘एकलव्य’ से जुड़ गईं। संस्था के संस्थापक सदस्यों में शामिल अंजली ने स्कूली पाठ्यक्रम एवं पाठ्य सामग्री तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

33 साल के सफर में उन्होंने प्राथमिक शिक्षा, पुस्तकालय और शिक्षक शिक्षा को हाशियाकृत बच्चों के प्रति संवेदनशील बनाने पर काम किया है। अंजलि ने सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में नागरिक शास्त्र को आधुनिक नागरिकता की शिक्षा में तब्दील करने करने का सफल प्रयास किया। उनकी इस कोशिश को राज्यों के पाठ्यक्रमों और एनसीईआरटी में भी शामिल किया गया।

वे कई राज्यों और केंद्र में नीति बनाने की समिति में शामिल हैं। इन दिनों वह स्थानीय भाषाओं में बच्चों को सीखाने के लिए बहुभाषी कार्यक्रम तैयार करने में जुटी हैं।

दुर्गा रघुनाथ

दुर्गा रघुनाथ ‘जगरनॉट बुक्स’ की सह संस्थापक और सीईओ हैं। जगरनॉट बुक्स भारत में मोबाइल पर किताब प्रकाशित करने वाली पहली कंपनी है। इससे पहले दुर्गा नेटवर्क18 डिजिटल की सीईओ थीं। उन्होंने ही ‘फर्स्टपोस्ट डॉटकॉम’ की शुरुआत की थी।

फर्स्टपोस्ट डॉटकॉम महज तीन साल के अंदर भारत का तीसरा सबसे बड़ा डिजिटल न्यूज ब्रांड बन गया। फर्स्टपोस्ट ने करीब एक करोड़ पाठकों को अपनी साइट पर आकर्षित किया। इसने ऑनलाइन समाचार एवं विचार लेखन ने दुनिया में नए मानक बनाए। इसके ऐप को दुनिया भर में बेहतरीन आईपैड ऐप के लिए वेब्बी नामिनेशन भी मिला।

जगरनॉट से पहले दुर्गा फूड-टेक ब्रांड ‘जोमाटो’ में कंज्यूमर ग्रोथ की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। दुर्गा उद्यमशीलता और स्टार्टअप्स पर वक्ता के तौर पर भी देश भर में बुलाई जाती हैं।

एकता कपूर

एकता कपूर को भारत में टेलीविजन की दुनिया की बदलने का श्रेय जाता है। वह 'बालाजी टेलीफिल्म्स' की क्रिएटिव प्रमुख हैं। इसकी स्थापना 1994 में जब हुई थी, तब एकता की उम्र महज 19 साल थी।

2001 में एकता कपूर ने बालाजी के काम को विस्तार दिया और फिल्म निर्माण का सिलसिला शुरू किया। एकता कपूर कई कामयाब फिल्मों का निर्माण कर चुकी हैं।

कई टेलीविजन अवार्ड जीतने के अलावा उन्हें युवा प्रतिभा के तौर पर कई सम्मान मिल चुके हैं। इनमें द इकॉनॉमिक टाइम्स का बिजनेस वुमेन ऑफ द ईयर, 2002 और अर्नेस्ट एंड यंग आंत्रप्रिन्योर ऑफ द ईयर, 2001 और अमरीकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट का वुमेन ऑफ द ईयर, 2001 का सम्मान भी शामिल है।

गौरी सिंह

घरेलू कामगारों के बड़े बाजार को देखते हुए गौरी सिंह ने 'द मेड्स कंपनी' बनाई। लंदन स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स की डिग्री और स्वंयसेवी महिला संगठन 'सेवा' के साथ काम के अनुभव के साथ गौरी ने घरेलू कामगारों के काम को सेवा के तौर पर पेश किया।

उन्होंने कामगारों के अधिकार, उनकी गरिमा और सुरक्षा को भी रेखांकित किया है।

आज उनकी कंपनी 1,500 से ज्यादा ग्राहकों को सेवा मुहैया करा रही है और 3,000 से ज्यादा मजदूरों को प्रशिक्षित कर चुकी है। 2015 में उन्होंने तकनीक आधारित डिजिटल फर्म ‘नयाफाई’ की स्थापना की है जो घरेलू श्रम बाजार पर नजर रख रही है।

गौरी को ‘फार्च्यून इंडिया’ ने 2014 में 40 अंडर 40 युवा उद्यमियों की सूची में शामिल किया गया।

जया भारती

राजस्थान का ‘अयाद फाउंडेशन’ एक ऐसे समाज की कल्पना है जहां लोग खुशी से और सम्मान से रह सकें। इसका सपना बिहार की जया भारती ने 14 साल की उम्र में देखा था और दिल्ली की निधि अग्रवाल के साथ मिलकर उसे साकार कर दिखाया।

दोनों ने 2012 में अयाद फाउंडेशन बनाया, जो मुश्किल स्थितियों में रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों को जीने लायक माहौल देने का काम कर रहा है।

इनके परिसर में सामूहिक आवास, सामूहिक रसोई, कला और गतिविधि केंद्र, पुस्तकालय और स्वास्थ्य केंद्र, ऐंबुलेंस, सामुदायिक केंद्र, बिजली, पानी और इंटरनेट जैसे मूलभूत सुविधाएं मौजूद होंगी।

इसके अलावा फाउंडेशन ने बारिश के पानी के संकलन और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल इत्यादि का भी ख्याल रखा है।

कल्पना सरोज

कल्पना सरोज की पहचान एक ऐसी दलित उद्यमी की है कि जिन्होंने एक बीमार ओद्यौगिक यूनिट को कामयाबी की राह पर डाल दिया है। वह ‘कमानी ट्यूब्स लिमिटेड’ की चेयरपर्सन हैं। यह यूनिट दो दशक तक बंद रही है लेकिन कल्पना सरोज ने इसकी तस्वीर बदल दी है।

महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक दलित परिवार में जन्मीं कल्पना सरोज अपने पिता की तरह पुलिस में शामिल होना चाहती थीं। लेकिन बाल विवाह के बाद उन्हें सुसराल में अत्याचार का सामना करना पड़ा। कल्पना अपने घर लौट आईं और छोटे मोटे काम करना शुरू करते हुए आखिर कामयाबी के शिखर तक पहुंचीं।

कल्पना को भारत सरकार ने भारतीय महिला बैंक का निदेशक भी बनाया है। वह ‘दलित इंडियन चैंबर्स एंड इंडस्ट्री’ की अधिकारी भी हैं।

नेहा कृपाल

नेहा कृपाल ने 2008 में 'इंडिया आर्ट फेयर' की शुरुआत की। इस मेले का उद्देश्य भारतीय कला जगत और उसके बढ़ते बाजार को दर्शाना है। शुरुआत के साथ ही इस मेले को दुनिया भर में पहचान मिली।

इस मेले को देखने 3 लाख दर्शक पहुंचने लगे हैं। आयोजन के सात साल के भीतर यह दुनिया के सबसे आकर्षक कला मेले के तौर पर स्थापित हो चुका है।

इसकी कामयाबी के बाद नेहा ने 2015 में इंडिया आर्ट्स काउंसिल की शुरुआत की जिसका उद्देश्य भारतीय कला और अंतरराष्ट्रीय कला जगत को आपस में जोड़ना है।

नेहा को कला एवं सांस्कृतिक उद्यमशीलता के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। हाल ही में उन्हें वर्ल्ड इकॉनामिक फोरम, 2015-2021 की ओर से यंग ग्लोबल लीडर चुना गया है।

रमीना होरोकचाम

जिस देश में लोग सेक्सुअलिटी की बात भी खुले तौर पर नहीं करते हैं वहां रमीना होरोकचाम अंतरंग वस्त्रों और सेक्सुअल उत्पादों का कारोबार करती हैं वो भी ऑनलाइन। उनकी वेबसाइट है 'गोजी लव डॉट कॉम'। एमबीए करने के बाद शंघाई में तीन साल तक काम करने के बाद रमीना ने इस कारोबार में उतरने का फैसला लिया।

कारोबार के साथ-साथ रमीना का उद्देश्य पर्सनल उत्पादों के बारे में लोगों की आम धारना को बदलना भी है। वो मानती हैं कि उनकी वेबसाइट और उस पर मौजूद उत्पादों की वजह से समाज में अंतरंगता और सेक्सुअलिटी के बारे में जागरूकता का स्तर भी बढ़ेगा।

रमीना को नेस्कॉम ने स्टार्टअप्स के लिए शीसीईओ अवार्ड से सम्मानित किया है। ऑनलाइन पोर्टल ‘नार्थ ईस्ट व्हाइस’ ने उन्हें 12 भविष्य के कारोबारियों में चुना है।
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रूतवी मेहता

सात साल तक हॉस्पीटलिटी सेक्टर में काम करने के बाद रूतवी ने ‘फोटोकथा’ ब्लागिंग साइट की शुरुआत की। यह एक ट्रैवल साइट है, जो आपको डिजिटल मार्केटिंग सर्विस के अलावा हॉस्पिटलिटी की सेवा भी उपलब्ध कराता है।

अपनी कंपनी के माध्यम से रूतवी महिलाओं की स्टार्टअप के मार्केटिंग और सेल्स के काम में मदद करती हैं। हाल ही में रूतवी ने जैसलमेर से शिलांग तक की 3,300 किलोमीटर का सफर ऑटोरिक्शा से 12 दिन में पूरा किया है।

जल्दी ही रूतवी एक खास डिविजन शुरू करने वाली हैं जिसमें महिलाओं के लिए ऐसी यात्राओं की योजाना होगी जिसमे दुनिया भर के विभिन्न उत्सवों को देखना शामिल होगा।

हर साल दो महीने तक रूतवी लद्दाख जाकर बच्चों को पढ़ाने का काम भी करती हैं।
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