गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने वीडियोकॉन ग्रुप के पांच शहरों, दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, औरंगाबाद और अहमदनगर में फैले दफ्तरों में तीन दिन तक छापामारी की। यह छापामारी 13 जुलाई से 15 जुलाई के बीच की गई। इस संदर्भ में सरकार ने आठ जून को गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को आदेश दिया था कि वह समूह पर राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की निगरानी के आधार पर कार्रवाई करे।
80 कार्यालयों पर छापामारी
सूत्रों के अनुसार, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) में दर्ज 80 कार्यालयों पर गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय ने छापामारी की। इसके बाद समूह पर यह कार्रवाई की गई। इस मामले में एनसीएलटी ने वीडियोकॉन समूह की 13 कंपनियों के रिजोल्यूशन प्लान को मंजूर किया था। इन कंपनियों पर 62 हजार करोड़ रुपये का बैंकों का लोन था।
प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के घर पर भी छापामारी
इतना ही नहीं, वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के घर पर भी छापामारी की गई है। साथ ही एजेंसी ने रिजोल्यूशन प्रोफेशनल को भी सर्च किया है। मामले में एसएपआईओ ने डिजिटल डाटा, खाता बुक और कंपनीज के सर्वर को जब्त भी किया है। रिजोल्यूशन प्रोफेशनल को को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और 12 अन्य कंपनियों के की दिवाला प्रक्रिया के लिए नियुक्त किया गया था।
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज 26 बड़ी दिवालिया कंपनियों में से एक है। मालूम हो कि राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने जून में अपने आदेश में कहा था कि कुल 71,433 करोड़ रुपये के दावों में से 64,838 करोड़ रुपये के दावों को स्वीकार किया गया था। इसमें से सिर्फ 2,962 करोड़ रुपये की रकम ही मंजूर की गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी दिवालिया कंपनियों की सूची एनसीएलटी को दी थी।
प्रवर्तन निदेशालय भी मनी लांड्रिंग के मामले में वीडियोकॉन समूह के खिलाफ जांच कर रहा है। यह मामला सीबीआई के उस केस पर आधारित है, जो पिछले साल धूत के खिलाफ दर्ज किया गया था। ग्रुप पर भारतीय स्टेट बैंक के कंसोर्टियम वाले बैंकों के लोन को डुबाने का आरोप है।