निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने जानकारी दी कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और सरकार ने आईडीबीआई बैंक में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। डीआईपीएएम ने कहा है कि सरकार और एलआईसी आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहती हैं।
सरकार और एलआईसी की 94.72 फीसदी हिस्सेदारी
मौजूदा समय में आईडीबीआई बैंक में एलआईसी की 49.24 फीसदी हिस्सेदारी है और सरकार की इस बैंक में 45.48 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी गैर-प्रवर्तकों की है। इस संदर्भ में संभावित बोलीदाताओं के सवालों के जबाव में डीआईपीएएम ने कहा कि, 'जल्द होने वाले आईडीबीआई बैंक में भारत सरकार और एलआईसी की हिस्सेदारी बेची जाएगी और इसके साथ ही मैनेजमेंट कंट्रोल भी ट्रांसफर होगा।' एलआईसी ने जनवरी 2019 में आईडीबीआई बैंक में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल की थी।
सरकारी बैंकों को बोली लगाने पर रोक
मालूम हो कि डीआईपीएएम ने सरकारी बैंकों को आईडीबीआई बैंक के लिए बोली लगाने से रोक दिया है। डीआईपीएएम ने कहा कि आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स भी ट्रांजेक्शन एंडवाइजर्स बनने के लिए बोली नहीं लगा सकेगी। इसके अतिरिक्त मर्चेंट बैंकर में 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी या नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्ति या कंपनी को भी आईडीबीआई बैंक के लिए बोली लगाने की इजाजत नहीं होगी।
शुक्रवार को बढ़त पर बंद हुआ आईडीबीआई बैंक का शेयर
मालूम हो कि शुक्रवार को बीएसई पर आईडीबीआई बैंक के शेयर का भाव 3.19 फीसदी (1.20 अंक) चढ़कर 38.80 रुपये पर बंद हुआ था। मौजूदा समय में बैंक का बाजार पूंजीकरण 41,719.32 करोड़ रुपये है।
पांच साल बाद मुनाफे में आया बैंक
आईडीबीआई बैंक पांच साल बाद मुनाफे में आया है। 31 मार्च 2021 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में बैंक ने 1,359 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। जबकि इससे एक साल पहले वित्त वर्ष 2019-20 में बैंक को 12,887 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
ये है सरकार का लक्ष्य
गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 का बजट पेश करते समय घोषणा की थी कि चालू वित्त वर्ष के विनिवेश कार्यक्रम में सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों (पीएसबी) का निजीकरण भी किया जाएगा। बजट में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।