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रिन्यूएबल सेक्टर की सबसे बड़ी डील: गौतम अडाणी का बड़ा दांव, झोली में आई ये कंपनी

Mon, 04 Oct 2021 01:57 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने जापान के सॉफ्टबैंक और भारत के भारती समूह से एसबी एनर्जी इंडिया से एसबी एनर्जी इंडिया के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली है। 
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अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी - फोटो : Adani Group
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विस्तार
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अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने एसबी एनर्जी इंडिया के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह भारत के रिन्यूएबल ऊर्जा क्षेत्र का सबसे बड़ा सौदा है। यह सौदा लगभग 3.5 अरब डॉलर (26,000 करोड़ रुपये) का है। इसके लिए दोनों कंपनियों ने 18 मई 2021 को एग्रीमेंट किया था। 

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ये है कंपनी की योजना
पहले अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने एक बयान में कहा था कि, 'यह अधिग्रहण जनवरी 2020 में हमारे द्वारा बताए गए विजन की दिशा में एक और कदम है, जिसमें हमने 2025 तक दुनिया की सबसे बड़ी सौर कंपनी बनने और उसके बाद 2030 तक दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल कंपनी बनने की योजना बताई थी।'

एसबी एनर्जी इंडिया अब पूरी तरह अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड की हो गई है। इससे पहले एसबी एनर्जी में सॉफ्टबैंक ग्रुप और भारती ग्रुप की क्रमशः 80 फीसदी और 20 फीसदी हिस्सेदारी थी। इस अधिग्रहण से कई सेक्टर्स में रोजगार पैदा होंगे। अडानी ग्रीन की क्षमता में पांच गीगावॉट का इजाफा होगा। कंपनी के पोर्टफोलियो में सोलर, विंड और सोलर-विंड हाइब्रिड प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें से 1,700 मेगावॉट की परियोजनाएं ऑपरेशनल हैं जबकि बाकी पर काम चल रहा है। इससे एजीईएल कुल पोर्टफोलियो बढ़कर 19.8 गीगावॉट हो गया है।
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इससे पहले 2016 में हुई थी क्षेत्र की सबसे बड़ी डील
इससे पहले भारत के रिन्यूएबल ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी डील साल 2016 में हुई थी, जब टाटा पावर ने वेलस्पन एनर्जी की रिन्यूएबल ऊर्जा परिसंपत्तियों को करीब 10,000 करोड़ रुपये में खरीदा था।

10 वर्षों में 20 अरब डॉलर खर्च करेगा समूह 
हाल ही में अरबपति उद्योगपति गौतम अडाणी ने कहा था कि उनका समूह अक्षय ऊर्जा उत्पादन और कलपुर्जों के निर्माण पर अगले 10 वर्षों में 20 अरब डॉलर (1.47 लाख करोड़ रुपये) खर्च करेगा। साथ ही दुनिया का सबसे सस्ता हरित (ग्रीन) इलेक्ट्रॉन भी बनाएगा। जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर समिट में अडाणी ने कहा कि समूह अपनी अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को चार वर्षों में बढ़ाकर तीन गुना करने और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में उतरने की तैयारी में है।

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