खुदरा मुद्रास्फीति के मोर्चे पर राहत के बाद अब थोक महंगाई भी मार्च, 2023 में घटकर 1.34% रह गई। यह 29 माह का निचला स्तर है। इससे पहले नवंबर 2020 में यह 2.29% थी। यह लगातार छठा महीना है, जब थोक महंगाई दर इकाई अंक में है। विनिर्मित वस्तुओं व ईंधन की कीमतें घटने से थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई में गिरावट आई है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़ गई है। इससे पिछले महीने यानी जनवरी 2023 में थोक महंगाई दर 4.73 फीसदी पर रही थी। मार्च 2022 में थोक महंगाई दर 14.62 प्रतिशत रही थी।
सरकार के सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक महंगाई फरवरी, 2023 में 3.85% रही थी। वहीं, मार्च, 2022 में यह 14.63 फीसदी के उच्च स्तर पर रही थी। इस बीच, खाद्य वस्तुओं की महंगाई फरवरी के 3.81 फीसदी से बढ़कर मार्च में 5.48 फीसदी पर पहुंच गई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि मार्च, 2023 में महंगाई दर घटने की मुख्य वजह बुनियादी धातुओं, कपड़ा, गैर-खाद्य वस्तुओं, खनिजों, रबड़ और प्लास्टिक उत्पादों, कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, कागज और कागज से बने उत्पादों की कीमतों में कमी आना है।
खुदरा मुद्रास्फीति भी गिरकर 5.66 प्रतिशत पर पहुंची
मार्च के थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी करने के कुछ दिन पहले सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने 12 अप्रैल को कहा था कि खुदरा मुद्रास्फीति पिछले महीने घटकर 15 महीने के निचले स्तर 5.66 प्रतिशत पर आ गई। मार्च, 2023 में मुद्रास्फीति की दर में नरमी मुख्य रूप से बुनियादी धातुओं, खाद्य उत्पादों, वस्त्रों, गैर-खाद्य वस्तुओं, खनिजों, रबर, प्लास्टिक उत्पादों, कच्चे पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस और कागज व उससे बने उत्पादों की कीमतों में गिरावट के कारण आई है।
विभिन्न वस्तुओं से संबंधित थोक महंगाई दर
थोक महंगाई दर का अगला आंकड़ा (अप्रैल 2023 के लिए) पांच मई 2023 को जारी किया जाएगा।
सब्जी से लेकर दूध तक सस्ते
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले माह सब्जियां 2.22 फीसदी सस्ती हुईं। दूध की महंगाई दर फरवरी के 10.33 फीसदी से घटकर मार्च में 8.48 फीसदी रह गई।
केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा, विनिर्मित वस्तुओं की कीमतें तीन माह में पहली बार घटी हैं। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी रही, लेकिन ईंधन, बिजली और विनिर्मित उत्पादों की कम कीमत से इसकी भरपाई हो गई। खुदरा और थोक महंगाई दर में अंतर मार्च में बढ़कर 423 आधार अंक पहुंच गया है। नवंबर, 2022 में महज 24 आधार अंक था।
दाल से लेकर इन वस्तुओं ने बिगाड़ा बजट
आंकड़ों के मुताबिक, दाल की महंगाई दर मार्च, 2023 में बढ़कर 3.03 फीसदी पहुंच गई। फरवरी में यह 2.59 फीसदी रही थी। खनिज की महंगाई फरवरी के (-)10.62 फीसदी से बढ़कर मार्च में (-)4.98 फीसदी पहुंच गई। रसोई गैस की कीमतें 3.31 फीसदी बढ़ गईं। बेवरेजेज और चमड़े से बने उत्पाद की महंगाई दर भी बढ़ी है।
कृषि मांग की वजह से डीजल की बिक्री 15 फीसदी बढ़ी
औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए ट्रकों की आवाजाही बढ़ने और कृषि गतिविधियों में तेजी से अप्रैल, 2023 के पहले पखवाड़े में डीजल की बिक्री सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़कर 34.5 लाख टन पहुंच गई। मासिक आधार पर इसमें 8.4 फीसदी की तेजी रही। ईंधन की कुल मांग में इसकी करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी है। सोमवार को जारी उद्योग के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान पेट्रोल की बिक्री सालाना आधार पर लगभग दो फीसदी बढ़कर 11.4 लाख टन हो गई। हालांकि, मासिक आधार पर बिक्री में 6.6 फीसदी की गिरावट आई है। विमान ईंधन (एटीएफ) की मांग अप्रैल के पहले पखवाड़े में सालाना आधार पर 14 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,84,600 टन के स्तर पर पहुंच गई।
यात्री वाहनों का निर्यात 15 फीसदी बढ़ा, कारों में 10% उछाल
नई दिल्ली। देश से यात्री वाहनों का निर्यात 2022-23 में 15 फीसदी बढ़कर 6,62,891 इकाई पहुंच गया। इसमें मारुति सुजुकी इंडिया की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है, जिसने 2.5 लाख से अधिक वाहनों का निर्यात किया। 2021-22 में कुल 5,77,875 यात्री वाहनों का निर्यात हुआ था। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में यात्री कारों का निर्यात 10 फीसदी बढ़कर 4,13,787 इकाई पहुंच गया। उपयोगी (यूटिलिटी) वाहनों का निर्यात 23 फीसदी बढ़कर 2,47,493 इकाई रहा। हालांकि, इस दौरान वैन निर्यात 2021-22 के 1,853 इकाई से कम होकर 2022-23 में 1,611 इकाई रह गया।
निर्यात में मारुति की सर्वाधिक हिस्सेदारी ः पिछले वित्त वर्ष में यात्री वाहन श्रेणी के निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मारुति सुजुकी इंडिया की रही। इसके बाद ह्यूंडई मोटर इंडिया और किआ इंडिया का स्थान रहा। मारुति सुजुकी ने 2022-23 में 2,55,439 यात्री वाहनों का निर्यात किया, जो 2020-21 में निर्यात किए गए 2,35,670 वाहनों से 8 फीसदी अधिक है। ह्यूंडई ने 18 फीसदी वृद्धि के साथ 1,53,019 वाहनों का निर्यात किया। किआ इंडिया ने 85,756 वाहनों का निर्यात किया, जो 2021-22 की तुलना में 68% ज्यादा है।
दोपहिया व तिपहिया वाहन का रहेगा ईवी में दबदबा
विकासशील बुनियादी ढांचे, सरकारी प्रोत्साहन से ई-वाहनों (ईवी) की बिक्री में 2030 तक तेजी जारी रहने की संभावना है। केपीएमजी और सीआईआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहिया व तिपहिया वाहनों की बिक्री सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है।