दुनियाभर में हाल ही में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (आईडब्ल्यूडी) मनाया गया। आईडबल्यूडी को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस साल की थीम रखी गई...महिलाओं में निवेश : प्रगति में तेजी लाएं। इसका मकसद महिलाओं को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। यह तभी संभव है, जब आधी आबादी अपने खर्चों और भविष्य की अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए पहले से ही फंड प्रबंधन की तैयारी शुरू करे। इस पर कालीचरण की रिपोर्ट-
आपात स्थिति के लिए तैयारी
मैटरनिटी खर्च
मैटरनिटी (मातृत्व) जैसे खर्च से बचने के लिए अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस होना जरूरी है। अगर आप नौकरीपेशा महिला हैं तो अपने नियोक्ता से मैटरनिटी कवरेज प्राप्त कर सकती हैं या व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस खरीद सकती हैं। मैटरनिटी क्लेम करने से पहले वेटिंग अवधि का जरूर ध्यान रखें।
घर खरीदना
सेवानिवृत्ति
भारत में वित्तीय स्वतंत्रता, जल्द सेवानिवृत्ति आंदोलन जोर पकड़ रहा है। इसके लिए जीवनभर परिश्रम की आवश्यकता नहीं है। वित्तीय स्वतंत्रता और जल्द सेवानिवृत्ति के लिए अनिवार्य है...आप अपनी सालाना कमाई का 25 गुना बचाएं। अगर आपको सेवानिवृत्ति के बाद हर माह एक लाख रुपये की जरूरत पड़ने वाली है तो रिटायरमेंट तक तीन करोड़ का फंड बना लें।
बच्चों की शिक्षा
महंगाई के दौर में बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना तभी संभव है, जब आपके पास पर्याप्त फंड हो। इसके लिए आप कम उम्र से ही बचत शुरू कर सकती हैं। म्यूचुअल फंड, सुकन्या समृद्धि या प्रोविडेंट फंड जैसे विकल्प इसमें आपकी मदद कर सकते हैं। लेकिन, आज शिक्षा संबंधी महंगाई दोहरे अंकों में पहुंच गई है। इससे निपटने के लिए आप लंबी अवधि के लिए इक्विटी में निवेश कर सकती हैं। एक इंडेक्स फंड (जैसे निफ्टी 50 फंड) में मासिक एसआईपी शुरू कर सकती हैं, जो सालाना औसतन 12 फीसदी रिटर्न दे सकता है। इसी रिटर्न पर 18 साल तक हर माह 5,000 रुपये का निवेश 38 लाख में बदल सकता है। योगदान में 10 फीसदी वार्षिक वृद्धि 72 लाख दिला सकती है।
अपनी वित्तीय विरासत के बारे में भी सोचें
महिलाओं को भी अपनी वित्तीय विरासत के बारे में सोचना चाहिए। इसके लिए विल का होना जरूरी है। यह कानूनी बाध्य दस्तावेज है, जो बताता है कि आप अपनी संपत्तियां कैसे बांटना चाहती हैं। यह आपके आश्रितों के वित्तीय हितों की सुरक्षा में मददगार होता है। -आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंक बाजार