दिवाली से पहले लोग पेट्रोल और डीजल के दामों में रोजाना आधार पर हो रही बढ़ोतरी से बुरी तरह त्रस्त थे। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़ा एलान किया और ईंधन की कीमतों पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कटौती कर दी। सरकार की ओर से जनता को दिए गए इस तोहफे के कारण देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घट गईं। राज्यों ने भी केंद्र की देखा-देखी वैट में कटौती करना शुरू कर लोगों को राहत दी। गौर करने वाली बात ये है कि इसके बाद से ही हर रोज इनके दामों में होने वाले 10-20 पैसे इजाफे पर ब्रेक लग गया। आखिरी बार तेल के दामों में बढ़ोतरी बीती 4 नवंबर को देखने को मिली थी। हालांकि, बड़ा सवाल ये है कि आखिर 37 दिनों से तेल की कीमतें स्थिर क्यों हैं, क्या कारण है कि इनके दाम में 5-10 पैसे का भी इजाफा नहीं किया।
| शहर | पेट्रोल (रुपये/लीटर) | डीजल (रुपये/लीटर) |
| दिल्ली | 95.41 | 86.67 |
| मुंबई | 109.98 | 94.14 |
| चेन्नई | 101.40 | 91.43 |
| कोलकाता | 104.67 | 89.79 |
दाम स्थिर रहने के ये बड़े कारण
जैसा कि ज्ञात हैं आपके शहर में आने तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कई तरीके से बदलाव होता है। बेंट क्रूड की बात करें तो कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम गिर रहे हैं, यह भी तेल की कीमतों में वृद्धि न होने की बड़ी वजह है। बेंट क्रूड के भाव में गिरावट के साथ ही इसमें राज्य सरकारों की भी अहम भूमिका होती है। जिस तरह केंद्र के उत्पाद शुल्क घटाने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों शासित राज्यों ने अपने यहां वैट में कमी कर लोगों की सहानुभूति हासिल की है। आने वाले कुछ समय में देश के पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दामों में बदलाव न होने में इस फैक्टर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2022 में उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में संभवाना यह भी बन रही है कि राज्य सरकारें अप्रैल 2022 तक अपने स्तर पर पेट्रोल-डीजल के रेट पर रोक इसी तरह जारी रखें।
वर्तमान में बेंट क्रूड का हाल
दिवाली से पहले बेंट क्रूड का दाम रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहा था। इस अवधि में क्रूड ऑयल ने अपने तीन साल के सर्वकालिक उच्च स्तर को छूते हुए 83 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को छू लिया था। इसके बाद इसका भाव गिरता गया। वर्तमान हालात ये हैं कि शुक्रवार को कारोबार बंद होने पर लंदन ब्रेंट क्रूड 75.15 डॉलर प्रति बैरल पर और अमेरिकी क्रूड 71.96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। गौरतलब है कि बेंट क्रूड का यह स्तर लगातार गिरावट के बीते दो दिनों में हुई बढ़ोतरी के बाद का है।
तेल के दामों में और कमी की उम्मीद
बता दें कि हाल ही में केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में तेल के दामों को काबू में रखने व उनमें कमी लाने के इरादे से अपने सामरिक भंडार से 50 लाख बैरल कच्चा तेल जारी करेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में गिरावट लाने के लिए अमेरिका, चीन व जापान समेत कई बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश इसी तरह का कदम उठा रहे हैं। यह पहला मौका है जब भारत अपने सुरक्षित व सामरिक तेल भंडार से कच्चा तेल बाजार में जारी करेगा।