जीएसटी व्यवस्था में यदि किसी कारोबारी की ई-वे बिल जारी करने की सुविधा ब्लॉक हो गई हो तो घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इसे दोबारा शुरू करने की सुविधा भी शुरू कर दी है। जीएसटी नेटवर्क के अनुसार, यह फैसला कारोबारियों की सहूलियत को देखते हुए लिया गया है।
केंद्र और राज्य सरकारें जीएसटी रिटर्न पर कारोबारियों से फीडबैक लेने के लिए सात दिसंबर को स्टेकहोल्डर फीडबैक दिवस का आयोजन करेगी। यह फीडबैक एक अप्रैल 2020 से लागू हुए नए रिटर्न फॉर्म के लिए लिया जाएगा।
जीएसटीएन का कहना है कि ई-वे बिल सुविधा को ब्लॉक करना अस्थायी कदम है। जब करदाता जीएसटीआर-3बी रिटर्न फाइल करेगा, तब ई-वे बिल पोर्टल पर सुविधा दोबारा शुरू हो जाएगी। यदि यह ई-वेबिल पोर्टल पर अपडेट नहीं होता है, तो करदाता डिफॉॅल्ट अवधि के लिए मासिक रिटर्न दाखिल करने के बाद ई-वे बिल पोर्टल पर सर्च अपडेट ब्लॉक स्टेटस का चयन कर सकते हैं। इसके बाद जीएसटी कॉमन पोर्टल से अपने नवीनतम मासिक रिटर्न फाइलिंग स्टेटस को अपडेट कर सकते हैं। यह सुविधा ई-वे बिल सिस्टम और जीएसटी सिस्टम के बीच स्वचालित आदान-प्रदान के ओवरराइड के रूप में दी गई है।
यदि कोई करदाता वाजिब कारणों से मासिक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता है, तो वह ई-वे बिल जनरेशन सुविधा को अनब्लॉक कराने के लिए संबंधित अधिकारी को आवेदन कर सकता है। इसके साथ करदाता को उपयुक्त कारण और आवश्यक दस्तावेज भी देना होगा। यदि कर अधिकारी ने अपील स्वीकार की तो उस कारोबारी को दोबारा ई-वे बिल जनरेशन सुविधा दे दी जाएगी। इसकी सूचना करदाता को पंजीकृत ई-मेल और मोबाइल नंबर पर दे दी जाएगी।
जीएसटीएन ने स्पष्ट किया है कि जिन जीएसटीधारकों का माल रास्ते (ट्रांजिट) में है, उन पर जीएसटी ई-वे बिल ब्लॉक हो जाने का भी कोई असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि पहले से ही जारी ई-वे बिल पर सुविधा ब्लॉक किए जाने का कोई प्रभाव नहीं होगा। इसके अलावा, जो ट्रांसपोर्टर केवल ई-वे बिल पोर्टल पर पंजीकृत हैं और जीएसटी पोर्टल पर पंजीयन नहीं कराया है, वे भी इससे प्रभावित नहीं होंगे और अपना व्यवसाय जारी रख सकेंगे।