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PACS: 'किसानों और गरीबों को भी पैक्स के जरिए मिलेगा सस्ती दवा का लाभ', बोले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

Mon, 08 Jan 2024 01:02 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

PACS: केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पीएम भारतीय जन औषधि केंद्र के रूप में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (Primary Agricultural Credit Societies, PACS) के विषय पर नई दिल्ली में आयोजित 'राष्ट्रीय पैक्स मेगा कॉन्क्लेव' की अध्यक्षता की।
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Amit Shah - फोटो : Social Media
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विस्तार
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केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि 241 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) की ओर से देशभर में खोले गए जन औषधि केंद्रों से गरीब ग्रामीणों और किसानों को भी सस्ती दरों पर जेनेरिक दवाओं का लाभ मिलेगा। अब तक सरकार के जनऔषधि केंद्र बड़े पैमाने पर शहरों में खोले जाते थे, जिससे शहरी गरीबों को फायदा होता था। अब यह लाभ गरीब ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है।

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राष्ट्रीय पैक्स मेगा कॉन्क्लेव में देश को विकसित बनाने के लक्ष्य का जिक्र करते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा कि सहकारी समितियों की मदद से गरीब भी समृद्ध होंगे। उन्होंने सभी पैक्स से सरकार से जुड़े 22 विभिन्न कार्यों को अपनाने का आग्रह किया। पांच पैक्स को जन औषधि केंद्र स्टोर कोड प्रमाणपत्र देते हुए शाह ने कहा कि पैक्स अपने उपनियमों में किए गए बदलावों के चलते जन औषधि केंद्र खोलने के लिए अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार कर सकती हैं।

शाह ने कहा, पिछले छह महीनों में पैक्स से 4,470 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 2,373 पैक्स को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। उनमें से लगभग 241 ने जन औषधि केंद्रों का संचालन शुरू कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में ये आउटलेट खुलने से वहां के लोग अब किफायती दरों पर जेनेरिक दवाएं खरीद सकते हैं। उदाहरण के लिए, कैंसर की दवाएं जिनकी कीमत खुले बाजार में लगभग 2,250 रुपये है, उन्हें 250 रुपये में बेचा जाता है। यहां तक कि ग्रामीण लड़कियां भी इन केंद्रों से एक रुपये में सैनिटरी नैपकिन खरीद सकती हैं। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (पीएमबीजेके) आम जनता को गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराते हैं, जिनकी कीमत खुले बाजार में उपलब्ध ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50-90 प्रतिशत कम होती है। इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को 2,000 से अधिक प्रकार की जेनेरिक दवाएं और लगभग 300 सर्जिकल आइटम सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
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विविध कारोबारों से जुड़ाव
शाह ने कहा कि पैक्स अब कृषि ऋण एजेंसी के अलावा विभिन्न कारोबारों से जुड़ रही हैं। कुछ ने जन औषधि केंद्र, सामान्य सेवा केंद्र खोले हैं, जबकि कुछ एलपीजी और उर्वरक वितरक, पेट्रोल पंप और राशन दुकान संचालक के रूप में काम कर रही हैं।

60 करोड़ गरीबों को मिली मदद
शाह ने कहा, यह एक विडंबना थी कि दवाओं का शीर्ष वैश्विक आपूर्तिकर्ता होने के बावजूद भारत में लगभग 60 करोड़ गरीब लोग हैं जो इसे खरीदने में सक्षम नहीं थे। हालांकि, मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि गरीबों को कम कीमत पर दवाएं मिलें जन औषधि केंद्रों को सुव्यवस्थित करने के लिए कदम उठाए। इससे गरीबों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिली है, जो पिछले नौ वर्षों में दवाओं पर अनुमानित 26,000 करोड़ रुपये बचाने में सक्षम हुए हैं।

मदद के लिए तैनात किए 40 फील्ड अफसर
शाह ने कहा कि इन केंद्रों को चलाने में पैक्स की मदद के लिए लगभग 40 फील्ड अधिकारियों को तैनात किया गया है। अब तक पैक्स सिर्फ कृषि-ऋण व्यवसाय तक ही सीमित थीं, क्योंकि उनके उपनियम उन्हें केवल ऐसा करने की अनुमति देते थे। यही कारण था कि इनके बंद होने की स्थिति बन गई। इसलिए एक अलग सहयोग मंत्रालय के गठन के बाद, सरकार अपनी व्यावसायिक गतिविधियों में विविधता लाने के लिए 56 पहल की और एक मॉडल उपनियम लेकर आई, ताकि पैक्स को बंद होने से बचाया जा सके। इस मॉडल उपनियम लेकर आए जिसमें 22 अलग-अलग गतिविधियों को करने का प्रावधान शामिल था। सभी पैक्स ने मॉडल उपनियम को अपना लिया है और यहां तक कि नए इसके तहत पंजीकृत हो रही हैं।

2,000 केंद्र खोलने का लक्ष्य  
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि पहले चरण में पैक्स के माध्यम से 2,000 जन औषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य है। पैक्स 2,000 से अधिक केंद्र खोल सकती है। हमारा फार्मा विभाग मंजूरी देने के लिए तैयार है। आउटलेट संचालित करने के लिए पैक्स को सर्वोत्तम इनपुट मिलेंगे। वर्तमान में, देश में लगभग 63,000 कार्यात्मक पैक्स हैं।

पांच वर्ष में दो लाख नई पैक्स खुलेंगी
शाह ने जोर देकर कहा कि देशभर में पैक्स की मजबूत नींव के बिना सहकारी आंदोलन नहीं हो सकता। अगले पांच वर्षों में लगभग 2 लाख पैक्स स्थापित की जाएंगी, हर गांव में कम से कम एक पैक्स होगी। यही नहीं, विभिन्न व्यवसायों को निर्बाध और पारदर्शी तरीके से करने में मदद करने के लिए पैक्स का कम्प्यूटरीकरण चल रहा है।
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