अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने गुरुवार को विश्वास जताया कि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य को हासिल कर लेगा। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति का आधार पिछले वर्षों में इसके सुधारों के लक्ष्यों पर टिके रहना है।
उन्होंने कहा, 'भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक चमकता सितारा रहा है और आगे भी रहेगा। हम 2024 में भारतीय विकास के अनुमानों को 6.5 प्रतिशत तक अपग्रेड कर रहे हैं। यह 2023 में भारतीय अर्थव्यवस्था के काफी मजबूत प्रदर्शन के कारण किया गया है। जॉर्जीवा ने कहा कि भारत की एक बहुत बड़ी बढ़त डिजिटल बुनियादी ढांचे, डिजिटल आईडी के साथ डिजिटल मोर्चे पर किया गया साहसिक कार्य और डिजिटल को भारत की ताकत बनाने के मामले में है। जिससे छोटे उद्यमियों को बाजारों में अपनी पहुंच बनाने का मौका मिलता है, जो वे पहले कर पाने में सक्षम नहीं थे।
उन्होंने कहा, "हम भारत में यह भी देख रहे हैं कि श्रम बाजारों में महिलाओं की भागीदारी अपर्याप्त है। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी ने भारतीय महिलाओं पर दांव लगाकर और अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी के लिए और गुंजाइश खोलकर सही किया है।
आईएमएफ चीफ ने कहा कि कम से कम, भारत यह मानता है कि नवाचार ही भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता को चलाएगा। ऐसे में आरएंडडी में बहुत प्रभावी और कुशल निवेश किया जा रहा है। यह भविष्य के विकास के लिए एक बहुत ही मजबूत आधार तैयार करता है।
उन्होंने कहा, "जिस मामले में अन्य देशों की तरह भारत को सतर्क रहने की जरूरत है, वहां यह देखना है कि सार्वजनिक वित्त की मजबूती और सार्वजनिक धन का उपयोग मजबूत वृद्धि के मध्यम अवधि के लक्ष्य का समर्थन कैसे करते हैं?"
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि लक्ष्य बहुत हद तक हासिल कर किया जा सकता है। मुझे ऐसा कोई कारण नहीं दिखता जिससे यह लक्ष्य हासिल ना हो सके। जॉर्जीवा ने कहा, ''भारतीय वित्त मंत्री के अंतरिम बजट के अनुसार सरकार भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए काम कर रही है और यह विकास चौतरफा और सर्वसमावेशी होगा।"