पूंजी बाजार नियामक सेबी के प्रस्तावित नियम लागू होते हैं तो वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) में निवेशकों की संख्या 40 फीसदी तक घट सकती है। साथ ही, खुदरा निवेशकों पर बहुत अधिक निर्भर रहने वाले डिस्काउंट ब्रोकर ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के जुलाई में प्रस्तावित नियम स्टॉक एक्सचेंज और ब्रोकरों पर लागू होने हैं।
बीएसई की प्रति शेयर आय 9 फीसदी तक घट जाएगी
जेफरीज के मुताबिक, बैंकेक्स साप्ताहिक अनुबंध को हटाने से बीएसई की प्रति शेयर आय (ईपीएस) वित्त वर्ष 2025-27 तक 7-9 फीसदी घट सकती है। हालांकि, अगर ट्रेडिंग गतिविधि बंद किए गए उत्पादों से स्थानांतरित हो जाती है तो इससे कम असर पड़ने का अनुमान है।
साप्ताहिक ऑप्शन हटाने से एनएसई पर ज्यादा असर
प्रति एक्सचेंज केवल एक बेंचमार्क इंडेक्स के लिए साप्ताहिक ऑप्शन को तर्कसंगत बनाने से एनएसई पर काफी प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान में इसके चार साप्ताहिक इंडेक्स एक्सपायरी हैं। इसमें बैंक निफ्टी सबसे महत्वपूर्ण है। ऑप्शन वॉल्यूम में इसका 50 फीसदी योगदान है। इस बदलाव से एनएसई के ट्रेडिंग वॉल्यूम में 30-35 फीसदी की कमी आ सकती है।