केंद्रीय बैंक चाहता है कि कर्जदाता 15 दिन में एक बार ग्राहकों की क्रेडिट जानकारी सिबिल और एक्सपीरियन जैसे क्रेडिट ब्यूरो से साझा करें। फिर, ब्यूरो को इसे पांच दिन में अपडेट करें। इसका मतलब है कि ग्राहकों की क्रेडिट जानकारी अब महीने में दो बार अपडेट होगी, जो पहले एक बार होती थी। इससे कर्जदाताओं और ग्राहकों दोनों को लाभ होगा। हालांकि, समय पर कर्ज नहीं चुकाने वाले ग्राहक इससे जरूर प्रभावित होंगे।
आपके लिए इसका मतलब
क्रेडिट जानकारी तेजी से अपडेट होना ग्राहकों के लिहाज से अच्छा कदम है। यह पूरे माह के दौरान अच्छा क्रेडिट व्यवहार बनाए रखने के लिहाज से ग्राहकों के लिए प्रोत्साहन है। साथ ही, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका खर्च नियंत्रण से बाहर न हो और कर्ज भुगतान समय पर होता रहे।
अगर किसी ग्राहक ने हाल ही में कर्ज चुकाया है तो इसकी जानकारी क्रेडिट रिपोर्ट में 15 दिन में ही अपडेट हो जाएगी। नया कर्ज लेने के लिए उसे क्रेडिट स्कोर अपडेट होने का महीनेभर इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
ऐसे बनती है आपकी साख
जब आप कोई कर्ज या क्रेडिट कार्ड लेते हैं, तो कर्जदाता आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को सिबिल और एक्सपीरियन जैसे क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट करता है। ब्यूरो आपके कर्ज चुकाने की स्थिति, डिफॉल्ट, क्रेडिट कार्ड का नियमित भुगतान जैसे डाटा के आधार पर आपका क्रेडिट स्कोर तैयार करता है।
क्रेडिट स्कोर देखकर ही कर्जदाता यह तय करते हैं कि ग्राहक को किस ब्याज दर पर और कितना कर्ज देना है।
जल्द मिलेगी डिफॉल्ट की सूचना
वर्तमान में, अगर कोई ग्राहक अपनी ईएमआई पर डिफॉल्ट करता है, तो यह जानकारी क्रेडिट रिपोर्ट में आने में 60 दिन का समय लग सकता है। लेकिन, नए नियमों के तहत जब कर्जदाता कंपनियां और बैंक हर 15 दिन में क्रेडिट जानकारी अपडेट करेंगे, तो डिफॉल्ट की जानकारी 30-40 दिनों में ही क्रेडिट रिपोर्ट में दिखने लगेगी।
...तो बार-बार बदल सकता है डाटा
बैंक बाजार के सीईओ आदिल शेट्टी ने बताया कि अब तक महीने के दौरान आपने अपने क्रेडिट कार्ड या कर्ज के साथ जो भी किया हो, उसका असर तब तक नहीं पड़ता था, जब तक मासिक अपडेट ब्यूरो तक नहीं पहुंचते थे। अब, यह बदल सकता है। अगर कर्जदाता और ब्यूरो बहुत छोटे अपडेट अंतराल पर सहमत होते हैं, तो आपका क्रेडिट स्कोर उतनी बार बदल सकता है, जितनी बार डाटा अपडेट होता है।