फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SEBI: सेबी ने एफएंडओ ट्रेडिंग को कड़ा करने के लिए उठाए कदम, 20 नवंबर से होंगे लागू नए नियम

Tue, 01 Oct 2024 10:03 PM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

SEBI: सेबी ने कहा कि अब डेरिवेटिव अनुबंध का मूल्य कम से कम 15 लाख रुपये होना चाहिए। पहले यह सीमा 5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच थी, जो 2015 में तय की गई थी। तब से बाजार मूल्य और कीमतों में करीब तीन गुना वृद्धि हो चुकी है।
विज्ञापन
सेबी - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों को होने वाले नुकसान को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मंगलवार को डेरिवेटिव ढांचो को मजबूत करने के लिए छह नए उपायों का एलान किया। इनमें सबसे बड़ा बदलाव न्यूनतम अनुबंध मूल्य को बढ़ाना है। 

विज्ञापन


सेबी ने कहा कि अब डेरिवेटिव अनुबंध का मूल्य कम से कम 15 लाख रुपये होना चाहिए। पहले यह सीमा 5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच थी, जो 2015 में तय की गई थी। तब से बाजार मूल्य और कीमतों में करीब तीन गुना वृद्धि हो चुकी है। बाजार नियामक ने फैसला लिया है कि हर स्टॉक एक्सचेंज पर डेरिवेटिव की समाप्ति अब हफ्ते में केवल एक बार होगी।

 
सेबी ने कहा कि समाप्ति के दिन जब प्रीमियम (मूल्य) कम होते हैं, तो ट्रेडिंग मुख्य रूप से सट्टेबाजी (खरीद-फरोख्त) के लिए होती है। वर्तमान में विभिन्न स्टॉक एक्सचेंज हर दिन के लिए ऐसे अनुबंध पेश करते हैं, जो हफ्ते में हर दिन समाप्त होते हैं। जिससे सट्टेबाजी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। 
विज्ञापन




सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों को निर्देश दिया है कि वे 'इंट्राडे पॉजिशन लिमिट' (दिन के दौरान ट्रेडिंग की स्थिति) की निगरानी करें। फरवरी 2025 से ऑप्शन खरीदने वाले निवेशकों से प्रीमियम पहले ही जमा कराना अनिवार्य किया गया है। इसका मतलब है कि जब आप ऑप्शन खरीदते हैं, तो आपको पहले से ही शुल्क चुकाना होगा। इसके अलावा, ऑप्शन अनुबंधों की समाप्ति के दिन शॉर्ट ऑप्शन के लिए दो फीसदी अतिरिक्त मार्जिन देना होगा।

बाजार नियामकों ने स्टॉक एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशनों (जो कारोबार के निपटान का काम करते हैं) को कहा है कि वे नए नियमों को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाएं। डेरिवेटिव बाजार निवेशकों को सही मूल्य पता करने, बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने और जोखिम प्रबंधन में सहायक होते हैं। लेकिन इसमें जोखिम भी निहित होते हैं। जिसका मतलब है कि इसमें निवेश करने पर नुकसान की संभावना भी बनी रहती है। ये उपाय 20 नवंबर से चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें