न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से पूछा कि जांच एजेंसी ने बंबई उच्च न्यायालय की ओर से नौ जनवरी को दंपनी को दी गई अंतरिम जमानत की अवधि बार-बार बढ़ाए जाने का विरोध क्यों नहीं किया।
उच्चतम न्यायालय ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक चंदा कोचर व उनके कारोबारी पति दीपक कोचर को ऋण धोखाधड़ी मामले में इस साल जनवरी में दी गई दो सप्ताह की अंतरिम जमानत की अवधि बार-बार बढ़ाए जाने पर आपत्ति नहीं जताने पर सीबीआई से मंगलवार को सवाल किया।
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न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से पूछा कि जांच एजेंसी ने बंबई उच्च न्यायालय की ओर से नौ जनवरी को दंपनी को दी गई अंतरिम जमानत की अवधि बार-बार बढ़ाए जाने का विरोध क्यों नहीं किया।
पीठ ने कहा, ''यह आदेश नौ जनवरी का है और अंतरिम जमानत केवल दो सप्ताह के लिए दी गई। आपने विरोध क्यों नहीं किया? आप इसे इतने लंबे समय तक इसे जारी रखने की अनुमति क्यों दे रहे हैं? हमारे अनुसार, यह याचिका निरर्थक हो गई है क्योंकि लागू आदेश केवल दो सप्ताह के लिए था। आपको वहां (उच्च न्यायालय) में आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी।"
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न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने राजू से उच्च न्यायालय में सुनवाई की अगली तारीख के बारे में पूछा। वकील ने न्यायाधीश को बताया कि अभी तक कोई नई तारीख घोषित नहीं की गई है। न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने कहा, 'आपको उच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए था।' इसके बाद राजू ने उनसे कहा कि वह बंबई में अपने समकक्ष से उच्च न्यायालय का रुख करने का अनुरोध करेंगे। पीठ ने उच्च न्यायालय के नौ जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की और राजू से कहा कि वह निर्देश प्राप्त करें कि क्या करने की जरूरत है।
उच्च न्यायालय ने नौ जनवरी को ऋण धोखाधड़ी मामले में दंपति को ''लापरवाह और यांत्रिक'' तरीके से और स्पष्ट रूप से बिना सोचे-समझे गिरफ्तार करने के लिए सीबीआई को फटकार लगाई थी और उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी।
सीबीआई ने वीडियोकॉन-आईसीआईसीआई बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में कोचर दंपति को 23 दिसंबर, 2022 को गिरफ्तार किया था। दंपती ने अपनी गिरफ्तारी को 'अवैध और मनमाना' करार देते हुए इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उन्होंने अंतरिम आदेश के माध्यम से जमानत पर जेल से रिहा होने की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि कोचर दंपति की गिरफ्तारी कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है और वे अपनी याचिकाओं पर सुनवाई और अंतिम निस्तारण होने तक जमानत पर रिहा होने के हकदार हैं।