केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पांच राज्यों के सर्वाधिक पिछड़े 44 जिलों में ई-गवर्नेंस का लाभ देने के लिए 6466 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत आदिवासी बहुल इन आकांक्षी जिलों के 7287 गांवों में मोबाइल टावर लगाए जाएंगे। इन जिलों के अतिरिक्त नक्सली हिंसा से प्रभावित जिलों के गांवों और दुर्गम इलाकों में आवागमन के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के पहले और दूसरे चरण को जारी रखने का भी फैसला हुआ।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया, मोदी सरकार ने बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। सरकार ने इस दिन आदिवासी बहुल जिलों में विकास का संकल्प लिया था। इसी के तहत आर्थिक मामलों की समिति ने देश के 44 आकांक्षी जिले को 4जी सेवा के अंतर्गत लाने का फैसला किया है। इस फैसले से ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के 44 जिलों को विशेष लाभ मिलेगा।
4490 किमी लंबी सड़क और 105 पुल बने
केंद्रीय मंत्री ठाकुर ने बताया, नक्सल प्रभावित जिलों में पीएमजीएसवाई के पहले और दूसरे चरण के तहत 4490 किमी लंबी सड़क और 105 पुल पहले ही पूरे हो चुके हैं। राज्य केंद्र सरकार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से संबंधित इन महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध करते रहे हैं। इन राज्यों को शेष कार्यों को पूरा करने में मदद करने के लिए सितंबर, 2022 तक का समय विस्तार दिया जा रहा है।
पीएमजीएसवाई : जंगलों और नदियों के ऊपर बनेंगी सड़कें
पीएमजीएसवाई-एक और दो के तहत अधिकांश लंबित परियोजनाएं कोविड लॉकडाउन, विस्तारित बारिश आदि से प्रभावित पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में हैं। इन इलाकों में घने जंगलों, पहाड़ व नदियों के ऊपर सड़कें बनाई जाएंगी।
20,950 किमी सड़क और 1974 पुलों के काम बाकी
पहले और दूसरे चरण के सड़क निर्माण में कुल 1,84,444 आवासीय इलाकों में से 2432 में काम शेष रह गया है। कुल स्वीकृत 6,45,627 किमी सड़क और 7523 पुलों में से 20,950 किमी सड़क और 1974 पुलों के काम बाकी हैं।
विकास को मिलेगी रफ्तार
सड़कों के विस्तार के केंद्रीय कैबिनेट के फैसले से ग्रामीण विकास को रफ्तार मिलेगी और नक्सली हिंसा से प्रभावित उत्तर-पूर्व के दूरदराज के इलाकों को इसका लाभ मिलेगा।
-नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री