त्योहारी सीजन की शुरुआत होने वाली है। खुदरा विक्रेता आकर्षक ऑफर और अन्य प्रकार की छूट देने की तैयारी कर रहे हैं। खरीदारी त्योहारों का अहम हिस्सा है, जिसके लिए नो-कॉस्ट ईएमआई लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरा है। नो-कॉस्ट ईएमआई विशेष तौर पर त्योहारी सीजन में उपयोगी होता है, जब लोग घरों का नवीनीकरण कराना चाहते हैं या इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्नीचर जैसी अधिक मूल्य वाली वस्तुएं खरीदना चाहते हैं। यह सुविधा ग्राहकों को किसी उत्पाद की कुल लागत को बिना अतिरिक्त ब्याज का भुगतान किए एक निर्धारित अवधि के लिए आसान किस्तों में बांटकर बड़ी खरीदारी का विकल्प देती है। आप भी त्योहारों में नो-कॉस्ट ईएमआई का लाभ उठाना चाहते हैं, तो कुछ बातें जरूर जाननी चाहिए।
लागू रहता है सालाना ब्याज
आप जब नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनते हैं तो किस्त भुगतान पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं लिया जाता है। हालांकि,विक्रेता की ओर से ब्याज माफ नहीं किया जाता है,बल्कि छूट के रूप में पेश किया जाता है। इसके अलावा, कर्जदाता की ओर से एक वार्षिक ब्याज दर लागू रहती है, जिसका वहन विक्रेता करता है। इसलिए, बिना ब्याज के होने के बावजूद अन्य खर्च और शर्तें हैं,जिनके बारे में नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनते समय पता होना जरूरी है।
जहां तक संभव हो अग्रिम भुगतान करें
अपने बजट को प्रभावित किए बिना उत्पाद की अग्रिम लागत दे सकते हैं, तो नो-कॉस्ट ईएमआई से बचें। कई बार यह विकल्प चुनने से अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। यह ध्यान रखें कि नो-कॉस्ट ईएमआई विकल्प आकर्षक होने के बावजूद सिर्फ चुनिंदा उत्पादों पर ही उपलब्ध हो सकता है। वहीं, अग्रिम भुगतान में कई लाभ मिलते हैं, जो अतिरिक्त बचत में मदद करते हैं। -आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंक बाजार