डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में इन निवेशकों ने 7,322 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। जुलाई में 32,359 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जून में 26,565 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। अप्रैल और मई में इन निवेशकों ने 34,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की थी। अप्रैल और मई में निकासी की मुख्य वजह आम चुनाव थे।
शेयर बाजार और आईपीओ की तेजी के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने इस साल जनवरी से लेकर अब तक भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 1,00,245 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस महीने अभी सोमवार का दिन बाकी है, फिर भी 57,359 करोड़ रुपये का अब तक निवेश किया है।
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डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में इन निवेशकों ने 7,322 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। जुलाई में 32,359 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जून में 26,565 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। अप्रैल और मई में इन निवेशकों ने 34,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की थी। अप्रैल और मई में निकासी की मुख्य वजह आम चुनाव थे। चुनाव में यह माना जा रहा था कि वर्तमान सरकार तीसरी बार सत्ता में आने से चूक सकती है। इससे एफआईआई पैसे निकालकर दूसरे देशों के बाजारों में लगा रहे थे। फरवरी व मार्च में 37,000 करोड़ रुपये निवेश किया था। जनवरी में 25,744 करोड़ रुपये की निकासी की गई थी।
इसलिए बढ़ रहा निवेश
विश्लेषकों का मानना है कि दुनियाभर में ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत होने से अब फिक्स्ड डिपॉजिट सहित अन्य फिक्स्ड इनकम पर भी रिटर्न कम मिलने की उम्मीद है। साथ ही, भारतीय बाजार अन्य उभरते बाजारों की तुलना में लगातार बेहतर रिटर्न दे रहा है।
ऐसे में विदेशी निवेशकों के लिए भारत एक आकर्षक स्थान के रूप में बना हुआ है।
आने वाले समय में और रकम आने की उम्मीद
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जिस तरह से भारतीय बाजार में लगातार अच्छा रिटर्न मिल रहा है, उससे यह उम्मीद है कि विदेशी निवेशक आगे भी बाजार में निवेश का रुझान जारी रख सकते हैं।
इस साल में अभी भी एक तिमाही बाकी है और निवेश का कुल आंकड़ा 1.50 लाख करोड़ रुपये के पार हो सकता है।