सफल नहीं रहा ये प्रयोग
व्यापारियों के संगठन कैट ने ऑनलाइन बाजार का मुकाबला करने के लिए देश के व्यापारियों को ऑनलाइन मंच पर एक साथ लाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टक्कर देने की बात कही थी। इसके लिए ईलाला.कॉम की शुरुआत की थी। लेकिन खुदरा व्यापारियों की ऑनलाइन बाजार से तालमेल न बिठा पाने के कारण यह प्रयोग सफल नहीं हुआ।
व्यापारियों के संगठन कैट के राष्ट्रीय सचिव सुमित अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि उनका संगठन जल्द ही 'भारत-ई-मार्केट' की शुरूआत करने जा रहा है। इसमें खुदरा व्यापारियों को दुकानों के माध्यम से खरीदारी-बिक्री करने के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से वस्तुओं को बेचने का अवसर मिल सकेगा। इसमें देश के किसी भी हिस्से में खड़ा ग्राहक एक एप के सहारे किसी वस्तु की खरीद के लिए उस वस्तु को बेचने वाली अपने आसपास की सभी दुकानों को देख सकेगा। वह दुकान पर पहुंचकर खरीद कर सकेगा, और चाहे तो ऑनलाइन माध्यम से खरीद भी कर सकेगा। प्रयोग के तौर पर इसकी शुरूआत रायपुर से की जा सकती है।
असमानता दूर करने की मांग
खुदरा व्यापारियों का कहना है कि वे अमेजन या फ्लिपकार्ट से मुकाबला करने में नहीं घबराते। सबसे बड़ी समस्या ऑनलाइन कंपनियों द्वारा वस्तुओं की खरीद पर दी जा रही अतार्किक छूट है। शुरुआत में बहुराष्ट्रीय कंपनियां बड़ी पूंजी के बल पर भारी छूट देकर घाटे में सामान बेचती हैं। बाद में ग्राहकों से वसूली करती हैं। अगर सामानों की खरीद और बिक्री का एक न्यूनतम मूल्य निर्धारित हो तो बहुराष्ट्रीय कंपनियां उनसे सस्ता माल नहीं बेच सकतीं और उनसे मुकाबला करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
नई ई-कॉमर्स नीति लाने पर सरकार विचार कर रही है। इनमें अतार्किक तरीके का उपयोग कर अवैध तरीके से ग्राहकों को प्रभावित करने से रोकने पर कानून बनाए जाने की संभावना है। इससे देश के 12 करोड़ खुदरा व्यापारियों और 25 करोड़ से ज्यादा लोगों के रोजगार की रक्षा हो सकेगी।