चेल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी
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खाद्य पदार्थों की महंगाई को देखते हुए ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम
एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि हमारे अनुमान के अनुसार चालू कैलेंडर वर्ष में रेपो रेट में कटौती की उम्मीद कम है। संभवत: किसी भी कटौती के लिए हमें चालू वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2025) का इंतजार करना पड़ सकता है। आरबीआई ब्याज दरों में कटौती का फैसला तब तक टालने की कोशिश करेगा, जब तक खाद्य पदार्थों की महंगाई संतोषजनक स्तर पर न पहुंच जाए।
7 से 9 अक्तूबर के बीच होनी है आरबीआई एमपीसी की बैठक
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 7 से 9 अक्तूबर के बीच होगी। इस बैठक में नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला लिया जाएगा। एमपीसी ब्याज दरों पर अपने फैसले के लिए खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है, अगस्त में मामूली रूप से बढ़कर 3.65% पर पहुंच गई है। जुलाई में महंगाई दर 3.54% थी। हालांकि, अगस्त में महंगाई का आंकड़ा केंद्रीय बैंक के औसत लक्ष्य 4% के नीचे है, लेकिन खाद्य पदार्थों के मामले में यह आंकड़ा 5.66% रहा, जिस पर केद्रीय बैंक की नजर बनी हुई है।
फरवरी 2023 के बाद ब्याज दरों नहीं हुआ है कोई परिवर्तन
अगस्त महीने में हुई बैठक में एमपीसी ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए रेपो रेट को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा था। लगातार नौवीं बार नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया गया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों में फरवरी 2023 के बाद से कोई परिवर्तन नहीं किया है। पिछली बैठक के दौरान मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में से चार ने ब्याज दरों को यथावत रखने के पक्ष में वोट दिया था। वहीं दो बाहरी सदस्यों ने इसमें कटौती की वकालत की थी। पिछले ही हफ्ते आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि ब्याज दरों में कटौती का फैसला महंगाई के दीर्घकालिक रुख पर निर्भर करेगा, न कि मासिक आंकड़ों पर।
सहायक कंपनियों में विनिवेश पर स्टेट बैंक चेयरमैन ने दी यह प्रतिक्रिया
सहायक कंपनियों में भारतीय स्टेट बैंक की हिस्सेदारी बेचने के सवाल पर सेट्टी ने साफ किया कि फिलहाल इस पर कोई विचार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "यदि इन सहायक कंपनियों की पूंजी में वृद्धि की जरूरत हो तो, निश्चित रूप से इस पर विचार करेंगे।" उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी भी बड़ी सब्सिडियरी को अपने संचालन विस्तार के लिए पैतृक कंपनी से पूंजी की जरूरत नहीं है। बैंक ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में 489.67 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी का निवेश किया है। कंपनी ने कर्मचारियों को ईएसओपी भी आवंटित किया है और इसके परिणामस्वरूप बैंक की हिस्सेदारी 69.95 प्रतिशत से मामूली रूप से घटकर 69.11 प्रतिशत हो गई है।