मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि बैंकों ने अन्य स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाकर क्रेडिट और जमा के अंतर को कम करने की कोशिश की है। इससे ब्याज दरों के प्रति उनकी संवेदनशीलता बढ़ जाती है और तरलता प्रबंधन के लिए चुनौतियां पैदा होती हैं।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मुंबई में आयोजित एफई मॉडर्न बीएफएसआई समिट 2024 को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "भारत में वित्तीय परिदृश्य एक संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, और आरबीआई सक्रिय रूप से यूपीआई जैसे नवाचारों को बढ़ावा दे रहा है।" उन्होंने कहा कि वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और भारत में अधिक समावेशी वित्तीय क्षेत्र बनाने के लिए भुगतान प्रणालियों को फिर से तैयार किया है।"
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मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बैंकों ने अन्य स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाकर क्रेडिट और जमा के अंतर को कम करने की कोशिश की है। इससे ब्याज दरों के प्रति उनकी संवेदनशीलता बढ़ जाती है और तरलता प्रबंधन के लिए चुनौतियां पैदा होती हैं। इसमें बदलाव करें करने की जरूरत है। CASA जमाओं के विभिन्न निहितार्थ हैं जिन्हें बैंकों को ध्यान में रखना होगा क्योंकि ऋण वृद्धि मजबूत बनी हुई है। बैंकों को ऋण हामीदारी मानकों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।"
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास कहा, "आरबीआई सक्रिय रूप से यूपीआई जैसे नवाचारों को बढ़ावा दे रहा है, पहुंच बढ़ाने और भारत में अधिक समावेशी वित्तीय क्षेत्र बनाने के लिए भुगतान प्रणालियों को फिर से तैयार कर रहा है... क्रेडिट वृद्धि जमा वृद्धि से आगे नहीं बढ़नी चाहिए, दोनों के बीच उचित संतुलन होना चाहिए।"