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विनिर्मित वस्तुओं के महंगे होने से जनवरी में 2.03 फीसदी पर पहुंची थोक मूल्य मुद्रास्फीति

Mon, 15 Feb 2021 12:23 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुद्रास्फीति - फोटो : pixabay
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भारत सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी कर दिए हैं। जनवरी 2021 में देश की थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2.03 फीसदी पर आ गई। दिसंबर 2020 में यह 1.22 फीसदी पर थी। वहीं नवंबर 2020 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मद्रास्फीति 1.55 फीसदी पर थी। 

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जनवरी 2020 में यह आंकड़ा 3.52 फीसदी था।

इसका मुख्य कारण विनिर्मित वस्तुओं के दाम में तेजी आना है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी आई। हालांकि विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ गए। आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की थोक मुद्रास्फीति जनवरी 2021 में शून्य से 2.8 फीसदी नीचे रही। यह एक महीने पहले यानी दिसंबर 2020 में शून्य से 1.11 फीसदी नीचे थी। इस दौरान सब्जियों की थोक मुद्रास्फीति शून्य से 20.82 फीसदी नीचे और ईंधन एवं बिजली की मुद्रास्फीति शून्य से 4.78 फीसदी नीचे रही। हालांकि आलू की थोक मुद्रास्फीति इस दौरान 22.04 फीसदी रही। गैर-खाद्य श्रेणी में मुद्रास्फीति इस दौरान 4.16 फीसदी रही। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पांच फरवरी को मौद्रिक नीति घोषणा में ब्याज दरों को लगातार चौथी बैठक में अपरिवर्तित रखा। रिजर्व बैंक ने घोषणा करते हुए कहा था कि निकट-भविष्य में मुद्रास्फीति का परिदृश्य अनुकूल हुआ है।

 
16 महीने के निचले स्तर पर खुदरा मुद्रास्फीति

खुदरा मुद्रास्फीति की बात करें, तो यह जनवरी में नरम होकर 4.06 फीसदी पर आ गई। इसका मुख्य कारण सब्जियों की कीमतों में कमी आना है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति इससे एक माह पहले दिसंबर 2020 में 4.59 फीसदी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वर्ग में कीमतों में सालाना आधार पर वृद्धि की दर जनवरी 2021 में 1.89 फीसदी रही। दिसंबर 2020 में खाद्य मुद्रास्फीति 3.41 फीसदी थी। रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति तय करते समय खुदरा मुद्रास्फीति की दर पर गौर करता है। संसद ने रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति को दो फीसदी घट-बढ़ के साथ चार फीसदी रखने की नीतिगत जिम्मेदारी दी है। जनवरी में लगातार दूसरे महीने खुदरा मुद्रास्फीति इस दायरे में रही है। 

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इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि, 'खाद्य मुद्रास्फीति में व्यापक आधार पर नरमी से जनवरी 2021 में सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति 16 महीने के निचले स्तर पर आ गयी। फरवरी 2021 में अब तक खाद्य मुद्रास्फीति ने मिश्रित रुख प्रदर्शित किया है। प्याज की कीमतों में तेजी तथा कच्चे तेल के बढ़ते दाम के चलते ईंधनों के खुदरा भाव में वृद्धि कुछ ऐसे चिंताजनक क्षेत्र हैं, जिनके ऊपर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।' जनवरी 2021 में सब्जियों की कीमतों में और नरमी आई। 

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