वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूएई दौरे पर अबू धाबी निवेश प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक शेख हमीद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। गोयल के इस दौरे पर दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए। कई अहम समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जिसके बाद भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच उद्योगों और उन्नत प्रौद्योगिकी शेयर करने का रास्ता साफ हो गया है।
प्रमुख तकनीकों का साझा इस्तेमाल करेंगे
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और संयुक्त अरब अमीरात के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने दोनों देशों के सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इसका मकसद निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और उद्योगों में प्रमुख तकनीकों का इस्तेमाल साझा तौर पर करना है।
गोयल के यूएई दौरे का मकसद
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त अरब अमीरात दौरे पर हैं। गोयल भारत-यूएई उच्च स्तरीय संयुक्त कार्य बल की 11वीं बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। बता दें कि जी 20 देशों की बैठक के बाद खाड़ी, यूरोप और दक्षिण एशिया के बीच व्यापार मार्ग को नया आकार देने का प्रयास हो रहा है। रेल और समुद्री संपर्क से जोड़ने पर भी मंथन हो रहा है।
दोनों देशों के उद्योगों को मिलेगी मजबूती
अब भारत और यूएई प्रौद्योगिकी के विकास में पारस्परिक प्रयासों से लाभ उठा सकेंगे। अब दोनों देशों में उद्योगों को मजबूती मिलेगी। समझौते के प्रभाव से दोनों देशों में संस्थागत, कॉर्पोरेट क्षमता, कौशल और सहयोग के कई अन्य क्षेत्रों में भी अवसरों की पहचान की जा सकेगी।
इंडस्ट्री 4.0 को सक्षम बनाने वाली टेक्नोलॉजी मिलेगी
एमओयू के अनुसार अब भारत और यूएई के बीच सप्लाई चेन को और लचीला बनाने, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अत्याधुनिक विषयों पर सहयोग किया जा सकेगा। ऊर्जा दक्षता, स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान, अंतरिक्ष प्रणाली के साथ-साथ इंडस्ट्री 4.0 को सक्षम बनाने वाली टेक्नोलॉजी पर भी दोनों देश आपसी सहयोग करेंगे।
इन क्षेत्रों में सहयोग करेंगे भारत-यूएई
समझौते के बाद दोनों देश अर्थव्यवस्था के विकास और रणनीतिक हित के क्षेत्रों में भी सहयोग करेंगे। कुछ इंडस्ट्री के नाम भी लिए गए हैं, लेकिन आने वाले दिनों में और भी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। जिन प्रमुख क्षेत्रों का नाम लिया गया है, इनमें शैक्षणिक सहयोग; सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास परियोजना शामिल हैं।
तीन साल का समझौता, साइन होते ही सभी शर्तें प्रभावी
इनके अलावा ज्ञान, बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और लाइसेंसिंग व्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीतियों की सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, मौसम विज्ञान विभाग से जुड़े मुद्दे, हलाल का सर्टिफिकेट देने के मामले में भी भारत और यूएई सहयोग करेंगे। सरकार की तरफ से जारी बयान के अनुसाकर समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर की तिथि से लागू हो जाएगा और तीन साल तक प्रभावी रहेगा। ऑटोमैटिक रिन्यूअल का भी प्रावधान शामिल किया गया है। अगर कोई देश समझौते को खत्म करना चाहता है तो छह महीने पहले राजनयिक चैनलों के माध्यम से सूचना देने की शर्त अनिवार्य रखी गई है।