केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान-भारत व्यापार सहयोग समिति के अध्यक्ष तातसुओ यासुनागा से मुलाकात कर दोनों देशों के व्यापार और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। बैठक में व्यापार सहयोग बढ़ाने, प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार और पारस्परिक विकास के अवसरों पर जोर दिया गया।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोलन ने जापान-भारत व्यापार सहयोग समिति के अध्यक्ष तातसुओ यासुनागा से मुलाकात की। इस बैठक का उद्देश्य दोनो देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रीत रहा।
दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर
सोशल मीडिया एक्स पर गोयल ने कहा कि जापान-भारत व्यापार सहयोग समिति (जेआईबीसीसी) के अध्यक्ष तातसुओ यासुनागा और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ सार्थक चर्चा हुई। भारत-जापान व्यापार संबंधों को और मजबूत करने, व्यापार सहयोग बढ़ाने और प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। पारस्परिक विकास और समृद्धि के लिए इस गतिशील साझेदारी को और गहरा करने की आशा है।
भारत-जापान के बीच हुए द्विपक्षीय व्यापार
भारत और जापान के बीच मजबूत और लगातार बढ़ते व्यापारिक संबंध हैं। वित्त वर्ष 2025 के दौरान जापान और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25.17 अरब डॉलर रहा। इसमें से जापान से भारत को निर्यात 18.92 अरब डॉलर और भारत से आयात 6.25 अरब डॉलर का था।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत के कुल आयात में जापान के निर्यात का हिस्सा 2.06 प्रतिशत था, जबकि इसी अवधि में जापान को भारत के निर्यात का हिस्सा 0.75 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2025 के दौरान भारत ने जापान को लगभग 3,900 वस्तुओं का निर्यात किया, जो दोनों देशों के बीच व्यापार की विविधता को दर्शाता है।
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वित्त वर्ष 2025 के दौरान भारत से जापान को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में 2.44 अरब डॉलर मूल्य के इंजीनियरिंग सामान, 1.06 अरब डॉलर मूल्य के कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन, 408.45 मिलियन डॉलर मूल्य के समुद्री उत्पाद, 658.45 मिलियन डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक सामान, 239.51 मिलियन डॉलर मूल्य के रत्न और आभूषण और 231.52 मिलियन डॉलर मूल्य की दवाएं और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं।
आयात की बात करें तो, भारत ने वित्त वर्ष 2025 में जापान से लगभग 4,000 वस्तुओं का आयात किया। इस दौरान जापान से भारत में आयात 18.92 अरब डॉलर रहा। प्रमुख आयातों में 3.31 अरब डॉलर मूल्य के परमाणु रिएक्टर और 2.01 अरब डॉलर मूल्य की विद्युत मशीनरी और उपकरण शामिल थे।