नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से राहत पैकेज हासिल करने के लिए चीन और दो अन्य मित्र देशों के साथ 27 अरब डॉलर से अधिक के कर्ज और देनदारियों की शर्ते फिर से तय करने की मांग की है।
वाशिंगटन स्थित अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पिछले महीने घोषणा की थी कि उसने पाकिस्तान के साथ सात अरब अमेरिकी डॉलर का ऋण प्रदान करने के लिए एक कर्मचारी-स्तरीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसे 37 महीनों के लिए वितरित किया जाएगा। हालांकि, इसके साथ ही आईएफएफ ने कड़ी शर्तें भी रखीं, जिसमें फंड के बोर्ड की ओर से ऋण के लिए अंतिम मंजूरी देने से पहले पाकिस्तान की ओर से कार्रवाई की आवश्यकता थी।
वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने बीजिंग से लौटने के बाद रविवार को मीडिया को बताया कि चीन, सऊदी अरब और यूएई के साथ 27 अरब डॉलर की री-प्रोफाइलिंग के लिए बातचीत चल रही है।
औरंगजेब ने कहा कि पाकिस्तान ने तीनों देशों को पहले ही अपने 12 अरब डॉलर से अधिक के वार्षिक ऋण पोर्टफोलियो को तीन से पांच साल के लिए बढ़ाने के लिए कहा था ताकि हमें आईएमएफ बोर्ड की मंजूरी मिल सके। यह मंजूरी हमें अगले महीने मिलने की उम्मीद है।
पाकिस्तान ने अपने ऋणों की परिपक्वता अवधि– चीन से 5 बिलियन अमरीकी डालर,सऊदी अरब से 4 बिलियन अमरीकी डाॅलर और संयुक्त अरब अमीरात से 3 बिलियन अमरीकी डालर– को कम से कम तीन साल तक बढ़ाने का अनुरोध किया है।
औरंगजेब ने कहा कि चीनी पक्ष ने पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा कठिनाइयों को स्वीकार किया और नए व्यापारिक उद्यमों और ऊर्जा क्षेत्र के भुगतान की पुन: रूपरेखा में मदद करना चाहता है, इसके अलावा आईएमएफ बोर्ड में पाकिस्तान के मामले को प्रमुख हितधारकों में से एक के रूप में समर्थन देने में अपनी भूमिका निभाना चाहता है।
औरंगजेब ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के पुनर्भुगतान का मुद्दा शुरू में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उठाया था और इसके बाद प्रधानमंत्री ली केकियांग को औपचारिक पत्र लिखे गए थे। हालांकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान भुगतान की री-प्रोफाइलिंग की मांग कर रहा है कि न कि ऋण माफी या ब्याज दर में कटौती की।