पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार फिलहाल देश के आर्थिक ढांचे में संरचनात्मक बदलाव तो नहीं कर सकती लेकिन आईएमएफ के बेलआउट कार्यक्रम के मुताबिक उन्होंने कुछ सुधारों को लागू करने की बात कही जो आईएमएफ की 700 मिलियन डॉलर की कर्ज किश्त मिलने के लिए जरूरी हैं।
पैसों की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर चीन और सऊदी अरब के सामने अपनी झोली फैलाई है। दरअसल पाकिस्तान ने अगले सरकार के सत्ता में आने तक अपने बाहरी और घरेलू संसाधनों के बीच के अंतराल को भरने और आईएमएफ के बेलाउट कार्यक्रम को ट्रैक पर रखने के लिए चीन और पाकिस्तान से 11 अरब डॉलर की आर्थिक मदद देने की गुहार लगाई है।
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पाकिस्तान में कृषि को टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी
बता दें कि पाकिस्तान में फिलहाल कार्यवाहक सरकार काम कर रही है और बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए पाकिस्तान की सरकार खुदरा व्यापार, कृषि और रियल एस्टेट सेक्टर्स में भी टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है। साथ ही पाकिस्तान की सरकार अवैध करेंसी के मूवमेंट पर भी रोक लगाने की कोशिश कर रही है। पाकिस्तान की कार्यवाहक वित्त मंत्री शमशाद अख्तर ने वित्त और राजस्व की सीनेट की स्थायी समिति के सामने यह जानकारी दी। सीनेट की स्थायी समिति के अध्यक्ष सांसद सलीम मांडवीवाला हैं। शमशाद अक्तर ने बताया कि सरकार आर्थिक पुनर्द्धार योजना पर काम कर रही है और यह योजना जल्द ही पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकर को सौंपी जाएगी।
आईएमएफ की किस्त के लिए किए जाएंगे अर्थव्यवस्था में कुछ सुधार
पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार फिलहाल देश के आर्थिक ढांचे में संरचनात्मक बदलाव तो नहीं कर सकती लेकिन आईएमएफ के बेलआउट कार्यक्रम के मुताबिक उन्होंने कुछ सुधारों को लागू करने की बात कही जो आईएमएफ की 700 मिलियन डॉलर की कर्ज किश्त मिलने के लिए जरूरी हैं। इस बारे में पाकिस्तान की सरकार अक्तूबर के अंत में आईएमएफ के साथ बात करेगी। आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच बीते जून में तीन अरब डॉलर के पैकेज के समझौते पर सहमति बनी थी। वित्त मंत्री ने कहा कि फिलहाल आईएमएफ प्रोग्राम का पालन करना उनकी प्राथमिकता है ताकि देश में आर्थिक स्थिरता रहे।
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पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने कहा कि 700 मिलियन डॉलर की लोन किस्त से बाहरी प्रवाह बेहतर होगा। साथ ही चीन और सऊदी अरब से 11 अरब डॉलर की मदद देने की भी अपील की गई है। साथ ही सऊदी अरब से तेल सुविधा में रियायत की अपील की गई है। बाहरी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्त्रोतों जैसे विश्व बैंक, एशियन डेवलेपमेंट बैंक, इस्लामिक डेवलेपमेंट बैंक से 6.3 अरब डॉलर की मदद लेने की भी कोशिश की जा रही है।