सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के संगठन नैसकॉम ने शुक्रवार को कहा कि सरकार को प्रस्तावित ई-कॉमर्स नियमों में संबंधित संस्थाओं की गतिविधियों के अनुसार उनके दायित्वों को तर्कसंगत बनाने पर जोर देना चाहिए।
संगठन ने नए नियमों के संबंध में सुझाव देते हुए कहा है कि ग्राहकों को समय पर रिफंड देना सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं पर वापसी से जुड़ी देनदारी को सीमित करने की जरूरत है। इससे उन पर दबाव कम होगा।
सरकार की ओर से बीती 21 जून को जारी ई-कॉमर्स नियमों के मसौदे में ई-कॉमर्स कंपनियों पर धोखाधड़ी वाली फ्लैश सेल (तेज बिक्री) और माल एवं सेवाओं की गलत बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। मुख्य अनुपालन अधिकारी/शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम-2020 के तहत प्रस्तावित प्रमुख संशोधनों में से एक है।
5 अगस्त तक दे सकते हैं सुझाव
सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम-2020 में प्रस्तावित संशोधनों पर हितधारकों की ओर से सुझाव देने की समय सीमा 5 अगस्त तक बढ़ा दी थी। पहले अंतिम तिथि 6 जुलाई थी।
नैसकॉम का कहना है कि सरकार को उपभोक्ता संरक्षण की मजबूती पर जोर देना चाहिए। इसलिए उसकी सिफारिशें भी उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने पर ही केंद्रित हैं। प्रस्तावित नियमों में यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि दायित्व और इससे जुड़े जोखिम स्पष्ट हों। कुछ प्रस्तावित संशोधन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 के दायरे से अलग लगते हैं।
प्रभावित हो सकता है ग्राहकों का हित
इससे पहले इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) ने कहा था कि प्रस्तावित ई-कॉमर्स नियम न केवल ई-कॉमर्स कंपनियों, बल्कि ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं को सेवाएं प्रदान करने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए भारी अनिश्चितता पैदा कर सकता है। इससे ग्राहकों का हित प्रभावित हो सकता है।