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राजमार्ग निर्माण की सुस्त गति हुई सरपट, अक्टूबर से शुरू हो जाएगा वाराणसी में ट्रांसपोर्ट हबः गडकरी

Mon, 16 Jul 2018 10:24 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग, पोत परिवहन, जल संसाधन व नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि उनके अधीन आने वाले मंत्रालयों तथा विभागों ने बीते चार वर्षों के दौरान एक करोड़ लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं।

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चाहे जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल के दुर्गम इलाके हों या उत्तर प्रदेश-बिहार के मैदानी इलाके, सभी जगहों पर राजमार्ग निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। चालू परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं पर शिशिर चौरसिया ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश :

प्रश्न- वर्तमान समय में रोजगार को लेकर बड़ी बहस हो रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि रोजगार के अवसर घट रहे हैं। इस बारे में आपका क्या कहना है?
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उत्तर- बहस तो किसी भी विषय पर हो सकती है, रोजगार पर भी हो रही है। अगर आप रोजगार की बात करते हैं तो सुनिये, सिर्फ मेरे मंत्रालय के तहत चल रही परियोजनाओं में हमने बीते चार वर्षों में एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। इस समय देशभर में ढेरों परियोजना चल रही हैं और उनमें लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। आप देखिये कि जबसे केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनी है, तब से अब तक मेरे मंत्रालयों या विभागों की तरफ से 10 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक राशि की परियोजनाओं के ठेके दिए गए हैं। हमने राजमार्ग क्षेत्र को सुस्ती से निकाल कर पिछले चार सालों में इतना तेज कर दिया है कि परिवहन के दूसरे क्षेत्रों को अपनी गति बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे रोजगार सृजन की दर बढ़ी है। जब सड़क निर्माण की गति तेज हुई, तो इस क्षेत्र में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों का निर्माण दोगुना हो गया। सीमेंट उद्योग भी बढ़ रहा है। वहां भी लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

प्रश्न- अक्सर कहा जाता है कि राजमार्ग निर्माण में सिर्फ अकुशल मजदूरों को रोजगार मिलता है। कुशल लोग अभी भी रोजगार के लिए भटक रहे हैं?

उत्तर- ऐसा कतई नहीं है। आप हमारे निर्माण स्थल पर जाकर देखिए। वहां विश्वस्तरीय तकनीक से काम हो रहा है। दुनिया की उन्नत प्रौद्योगिकी वाली मशीनों से हम राजमार्गों का निर्माण कर रहे हैं। अभी हमने दिल्ली का कंजेशन दूर करने के लिए ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे का निर्माण किया, वह भी महज 500 दिनों में। उसे हमने ऐसा बनाया है कि अगले 50 सालों तक उसमें कुछ नहीं होगा। पूरी सड़क सीमेंट कंक्रीट की बनी है, हाई क्लास सरिया डाला गया है। सबकुछ अत्याधुनिक मशीनों से हुआ। वहां देश के बेहतरीन कॉलेजों से निकले इंजीनियर, मशीन मैन, बड़ी-बड़ी मशीन चलाने वालों से लेकर मजदूर, ट्रक ड्राइवर सबको रोजगार मिला। हम कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश जैसे दुर्गम इलाकों में राजमार्ग बना रहे हैं, वहां भी उन्नत तकनीक से काम हो रहा है, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बगैर सड़कों का निर्माण हो। सभी जगहों पर कुशल लोगों की मांग है।

प्रश्न- आपने हाल में राजमार्ग परियोजनाओं के लिए देश के अग्रणी बैंकों के प्रमुखों से मुलाकात की थी। इसका क्या निष्कर्ष निकला?
उत्तर- हमारी कुछ परियोजनाओं में फाइनेंशियल क्लोजर की समस्या थी, उसी के लिए बैठक करनी पड़ी। हमारी 125 में से 56 परियोजनाओं का फाइनेंशियल क्लोजर नहीं हो पा रहा था। ये परियोजनाएं हाइब्रिड एनुइटी की हैं। मैंने बैंकों से परियोजनाओं के वित्तपोषण का अनुरोध किया। साथ ही, बताया कि हमारे पास पैसे की कोई कमी नहीं है। यदि आप हमें पैसा नहीं देंगे, तो हम अपने फंड से पैसा दे देंगे या ईपीसी मोड पर बना लेंगे। हमने तो उन्हें यही बताने का प्रयास किया कि इससे बैंकों को पांच-सात लाख करोड़ रुपये का कारोबार मिलेगा। हमारा राजमार्ग क्षेत्र इस समय बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। आपका पैसा यहां सुरक्षित है। वे मान गए और राजमार्ग की परियोजनाओं का वित्तपोषण करने की हामी भर दी।

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प्रश्न- वाराणसी से हल्दिया तक आपने जलगमार्ग परिवहन की शुरुआत करने की घोषणा की है। यह कब तक शुरू होगी?
उत्तर- वाराणसी का मल्टी मोडल ट्रांसपोर्ट हब आगामी अक्तूबर तक बनकर तैयार हो रहा है। उसका उद्घाटन करने प्रधानमंत्री जाएंगे। गंगा में वाराणसी से हल्दिया के बीच जिस राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या एक को विकसित किया जा रहा है, उसमें 1,000 टन भार वहन क्षमता के जहाजों का वस्तु एवं यात्री परिवहन के लिए परिचालन शुरू हो जाएगा।

जलमार्ग विकास परियोजना के तहत 1,620 किलोमीटर के राष्ट्रीय जलमार्ग में हम तीन मीटर की जरूरी गहराई वाले जहाज के लिए रास्ता तैयार कर रहे हैं। इस मार्ग में बक्सर, पटना, साहेबगंज, फरक्का आदि स्थानों पर फिक्स्ड टर्मिनल होगा, जबकि कुछ स्थानों पर फ्लोटिंग टर्मिनल होगा। इन टर्मिनलों पर सामानों को उतारा या चढ़ाया जाएगा, साथ ही यात्रियों का भी परिवहन होगा। इससे सड़क या रेलमार्ग से भी सस्ते दर पर माल ढुलाई हो सकेगी।

प्रश्न- शहरों में प्रदूषण के साथ-साथ आबादी बढ़ती जा रही है। पुराने इलाकों में सड़कें चौड़ी हो नहीं सकतीं। ऐसी हालत में आप किस तरह के परिवहन साधन की वकालत करते हैं?
उत्तर- आमतौर पर इस समय सभी शहरों में जनता मेट्रो रेल चाहती है। सभी शहरों में मेट्रो रेल बनाना संभव नहीं है, क्योंकि इसे बनाने में प्रति किलोमीटर 350 करोड़ रुपये का खर्च पड़ता है। इसके बदले हमने कई शहरों में ट्रॉली बस चलाने की योजना तैयार की है। इसमें सड़कों पर उसी तरह से बिजली का ओवरहेड ट्रेक्शन वायर लगाया जाएगा, जैसे रेलवे अपनी पटरी पर ओवरहेड वायर बिछाता है। इसकी लागत काफी कम होती है और चलाना भी आसान। आप देखिए, मुंबई में बेस्ट को डीजल से बस चलाने में प्रति किलोमीटर 110 रुपये का खर्च आता है। नागपुर में इथेनॉल से बस चलाने में प्रति किलोमीटर 78 रुपये का खर्च आता है। लेकिन बिजली से बस चलाने का खर्च महज 55 रुपये प्रति किलोमीटर आएगा। इससे बस का किराया भी 30-40 फीसदी घट जाएगा।
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