केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग, पोत परिवहन, जल संसाधन व नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि उनके अधीन आने वाले मंत्रालयों तथा विभागों ने बीते चार वर्षों के दौरान एक करोड़ लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं।
चाहे जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल के दुर्गम इलाके हों या उत्तर प्रदेश-बिहार के मैदानी इलाके, सभी जगहों पर राजमार्ग निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। चालू परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं पर
शिशिर चौरसिया ने केंद्रीय मंत्री
नितिन गडकरी से विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश :
प्रश्न- वर्तमान समय में रोजगार को लेकर बड़ी बहस हो रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि रोजगार के अवसर घट रहे हैं। इस बारे में आपका क्या कहना है?
उत्तर- बहस तो किसी भी विषय पर हो सकती है, रोजगार पर भी हो रही है। अगर आप रोजगार की बात करते हैं तो सुनिये, सिर्फ मेरे मंत्रालय के तहत चल रही परियोजनाओं में हमने बीते चार वर्षों में एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। इस समय देशभर में ढेरों परियोजना चल रही हैं और उनमें लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। आप देखिये कि जबसे केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनी है, तब से अब तक मेरे मंत्रालयों या विभागों की तरफ से 10 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक राशि की परियोजनाओं के ठेके दिए गए हैं। हमने राजमार्ग क्षेत्र को सुस्ती से निकाल कर पिछले चार सालों में इतना तेज कर दिया है कि परिवहन के दूसरे क्षेत्रों को अपनी गति बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे रोजगार सृजन की दर बढ़ी है। जब सड़क निर्माण की गति तेज हुई, तो इस क्षेत्र में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों का निर्माण दोगुना हो गया। सीमेंट उद्योग भी बढ़ रहा है। वहां भी लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
प्रश्न- अक्सर कहा जाता है कि राजमार्ग निर्माण में सिर्फ अकुशल मजदूरों को रोजगार मिलता है। कुशल लोग अभी भी रोजगार के लिए भटक रहे हैं?
उत्तर- ऐसा कतई नहीं है। आप हमारे निर्माण स्थल पर जाकर देखिए। वहां विश्वस्तरीय तकनीक से काम हो रहा है। दुनिया की उन्नत प्रौद्योगिकी वाली मशीनों से हम राजमार्गों का निर्माण कर रहे हैं। अभी हमने दिल्ली का कंजेशन दूर करने के लिए ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे का निर्माण किया, वह भी महज 500 दिनों में। उसे हमने ऐसा बनाया है कि अगले 50 सालों तक उसमें कुछ नहीं होगा। पूरी सड़क सीमेंट कंक्रीट की बनी है, हाई क्लास सरिया डाला गया है। सबकुछ अत्याधुनिक मशीनों से हुआ। वहां देश के बेहतरीन कॉलेजों से निकले इंजीनियर, मशीन मैन, बड़ी-बड़ी मशीन चलाने वालों से लेकर मजदूर, ट्रक ड्राइवर सबको रोजगार मिला। हम कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश जैसे दुर्गम इलाकों में राजमार्ग बना रहे हैं, वहां भी उन्नत तकनीक से काम हो रहा है, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बगैर सड़कों का निर्माण हो। सभी जगहों पर कुशल लोगों की मांग है।
प्रश्न- आपने हाल में राजमार्ग परियोजनाओं के लिए देश के अग्रणी बैंकों के प्रमुखों से मुलाकात की थी। इसका क्या निष्कर्ष निकला?
उत्तर- हमारी कुछ परियोजनाओं में फाइनेंशियल क्लोजर की समस्या थी, उसी के लिए बैठक करनी पड़ी। हमारी 125 में से 56 परियोजनाओं का फाइनेंशियल क्लोजर नहीं हो पा रहा था। ये परियोजनाएं हाइब्रिड एनुइटी की हैं। मैंने बैंकों से परियोजनाओं के वित्तपोषण का अनुरोध किया। साथ ही, बताया कि हमारे पास पैसे की कोई कमी नहीं है। यदि आप हमें पैसा नहीं देंगे, तो हम अपने फंड से पैसा दे देंगे या ईपीसी मोड पर बना लेंगे। हमने तो उन्हें यही बताने का प्रयास किया कि इससे बैंकों को पांच-सात लाख करोड़ रुपये का कारोबार मिलेगा। हमारा राजमार्ग क्षेत्र इस समय बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। आपका पैसा यहां सुरक्षित है। वे मान गए और राजमार्ग की परियोजनाओं का वित्तपोषण करने की हामी भर दी।