लगातार जारी महंगाई और दुनियाभर के सेंट्रल बैंक की ओर से उठाए जा रहे कठोर कदमों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक भी अपनी अगली पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट में 50 बीपीएस तक का इजाफा कर सकता है। ग्लोबल इंवेस्टमेंट और वित्तीय सेवाओं के फर्म मॉर्गन स्टेनले ने इस बात का अंदेशा जताया है।
मॉर्गन स्टेनले ने अपनी रिपोर्ट में जताया अनुमान
माॅर्गन स्टेनले की ओर से कहा गया है कि हम पहले ब्याज दरों में 35 बीपीएस के इजाफे की उम्मीद कर रहे थे पर लगातार बढ़ रही महंगाई और दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंकों के इससे निपटने के लिए कठोर कदम उठाने के कारण आरबीआई भी रेपो रेट में अधिक वृद्धि कर सकता है। ग्लोबल फर्म ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि हमारे विचार में भारतीय केंद्रीय बैंक 50 बीपीएस तक रेपो रेट में इजाफा कर सकता है। इस रिपोर्ट के अनुसार टर्मिनल रेपो रेट 6.5 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है।
28 से 30 सितंबर के बीच होनी है आरबीआई की मौद्रिक नीति पर बैठक
बता दें कि आरबीआई की मौद्रिक नीति पर तीन दिनों की बैठक इस महीने की 28 से 30 सितंबर के बीच आयोजित होगी। दुनियाभर केंद्रीय बैंकों के रुझान को देखते हुए आरबीआई ने अब तक महंगाई ने निपटने के लिए रेपो रेट में इजाफा करने का फैसला लिया है। इस वर्ष आरबीआई अब तक रेपो रेट में तीन बार में 140 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर चुका है। फिलहाल रेपो रेट 5.40% है जो कोरोनापूर्व के स्तर 5.15 से अधिक है। आरबीआई यह भी सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि मुद्रास्फीति की दर आरबीआई के तय लक्ष्य के भीतर बनी रहे।
जनवरी 2022 के बाद महंगाई का बढ़ना जारी
मॉर्गन स्टेनले ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश में महंगाई की रेंज जनवरी 2022 के बाद से अप्रैल महीने को छोड़कर हर महीने में छह से सात प्रतिशत के बीच बनी रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हम उम्मीद करते हैं कि सितंबर महीने में भी महंगाई दर 7.1% से 7.4% के बीच बनी रहेगी क्योंकि खाद्य पदार्थों की कीमतों का बढ़ना लगातार जारी है। मॉर्गन स्टेनले के अनुसार जनवरी और फरवरी 2023 में महंगाई से हल्की राहत मिल सकती है पर यह तय है कि इसकी दर छह प्रतिशत के ऊपर बनी रहेगी।
खुदरा महंगाई दर अगस्त महीने में सात प्रतिशत पर पहुंची
बता दें कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण देश में में खुदरा महंगाई दर जुलाई महीने के 6.71% से बढ़कर अगस्त महीने में सात प्रतिशत पर पहुंच गई है। लगातार आठवें महीने में खुदरा महंगाई दर आरबीआई के टॉलरेंस बैंड के ऊपर बना हुआ है। बता दें कि आरबीआई के लिए मुद्रास्फीति की दर को दो से छह प्रतिशत के दायरे में रखना जरूरी है। गौरतलब है कि देश में धान समेत अन्य खाद्य पदार्थों की बुआई साल दर साल कम होने से फूड इन्फ्लेशन बढ़ता जा रहा है।