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Maharashtra: विपक्ष ने सुरंग परियोजना में लगाया 3000 करोड़ के घोटाले का आरोप; किसानों के मुद्दे पर किया वॉकआउट

Wed, 02 Jul 2025 03:49 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महाराष्ट्र में चल रहे विधानसभा और विधान परिषद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार पर ठाणे सुरंग परियोजना में 3,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। साथ ही, सोयाबीन किसानों को भुगतान न किए जाने पर सदन में हंगामा किया है। 
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महाराष्ट्र विधानसभा - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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महाराष्ट्र में विधानसभा और विधान परिषद का मानसून सत्र सोमवार से चल रहा है। इस दौरान सदन में विपक्षी पार्टियां सरकार पर तरह-तरह के आरोप लगा रही हैं। साथ ही, विपक्षी सदस्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी और विरोध करने के लिए सदन से वॉकआउट करते हुए नजर आएं। 

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सुरंग परियोजना में 3000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप 

विपक्ष ने ठाणे सुरंग परियोजना को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा। विपक्षी विधायकों ने बुधवार को महाराष्ट्र विधानमंडल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इस परियोजना में 3,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया और एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ देने का दावा किया।

विपक्ष ने की नारेबाजी 
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने मई में इस सुरंग परियोजना की निविदा प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। जब अयोग्य ठहराई गई कंपनी एलएंडटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। महा विकास अघाड़ी के विधायक और विधान परिषद सदस्य विधान भवन की सीढ़ियों पर नारेबाजी की। उन्होंने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के डर से अनुबंध रद्द करने का आरोप लगाया।

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विपक्षीय नेता अंबादास दानवे (शिवसेना उद्धव गुट), कांग्रेस के सत्यजीत पाटिल और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल इस प्रदर्शन में शामिल हुए। दानवे ने कहा कि इस परियोजना के बारे में गंभीर चिंताएं जताए जाने के बावजूद सरकार इस पर जोर देती रही। यह केवल तकनीकी चूक नहीं है। बल्कि 3,000 करोड़ रुपये का घोटाला है, जिसे महाराष्ट्र की जनता नजरअंदाज नहीं कर सकती।

मेघा कंपनी से चुनाव में सरकार को मिली थी फंडिंग- पाटिल 
कांग्रेस नेता सत्यजीत पाटिल ने आरोप लगाया कि ठेका जीतने वाली कंपनी चुनावी बांड की प्रमुख दाता रही है। उन्होंने कहा कि यह महज संयोग नहीं है। सरकार उसी कंपनी को फायदा पहुँचा रही है, जिससे उसे फंडिंग मिली। इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बुनियादी सवाल उठते हैं। पाटिल ने मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक कंपनी को दिए गए सभी ठेकों की तत्काल समीक्षा की मांग की।  विपक्ष का आरोप है कि यह कंपनी राज्य सरकार की पसंदीदा ठेकेदार बन गई है।

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सोयाबीन - फोटो : instagram

सोयाबीन किसानों को भुगतान न किए जाने पर सदन में हंगामा 

सोयाबीन खरीद के लिए किसानों को कथित तौर पर भुगतान नहीं किए जाने के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी सदस्यों ने हंगामे के बाद विधानसभा से वॉकआउट किया। विपक्ष ने सरकार पर सोयाबीन खरीद में अनियमितताओं और किसानों को भुगतान में देरी का आरोप लगाया। इसके बाद सदन में गरमागरम बहस हुई।

5,500 करोड़ रुपये 51,000 किसानों के खाते में डाले गए
सहकारिता एवं विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने सदन को बताया कि इस वर्ष राज्य में 562 केन्द्रों पर रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन की खरीद की गई। रावल ने कहा कि 51,000 से अधिक किसानों ने अपनी उपज बेची और 5,500 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। 

रावल ने 36 लाख रुपये रोके जाने की बात को स्वीकारा 
हालाँकि, अकोला जिले के बालापुर तालुका में एक घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मंत्री ने कहा कि किसानों का एक समूह,अंदुरा शेतकरी कंपनी, खरीद रिकॉर्ड में पंजीकृत होने के बावजूद गोदाम में 1,297 क्विंटल सोयाबीन पहुंचाने में विफल रही। उन्होंने बताया कि कंपनी प्रमुख के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है औक जांच लंबित रहने तक 36 लाख रुपये रोक लिए गए हैं।

रावल ने आश्वासन दिया कि इससे प्रभावित किसानों को भुगतान सुनिश्चित करने के प्रयास चल रहे हैं। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने विरोध करने के लिए सदन से बहिर्गमन किया।
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महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस। - फोटो : एएनआई (फाइल)

ड्रक तस्करों पर कठोर कार्रवाई के लिए कानून में संशोधन करेगी राज्य सरकार 

 मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ड्रग तस्करों पर कठोर कार्रवाई करेन के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन करेगी। इसे महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के अंदर लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संशोधन राज्य विधानमंडल के चल रहे मानसून सत्र में किया जाएगा।

जमानत मिलने के बाद अक्सर तस्करी दोबारा शुरू हो जाती 
विधान परिषद में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए फडणवीस ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और वर्तमान में उन पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाता है। हालांकि, गिरफ्तार किए गए लोगों को जमानत मिल जाती है और वे फिर से अपनी गतिविधियां शुरू कर देते हैं। इसलिए सरकार कानून में संशोधन कर रही है। 

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