सोयाबीन किसानों को भुगतान न किए जाने पर सदन में हंगामा
सोयाबीन खरीद के लिए किसानों को कथित तौर पर भुगतान नहीं किए जाने के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी सदस्यों ने हंगामे के बाद विधानसभा से वॉकआउट किया। विपक्ष ने सरकार पर सोयाबीन खरीद में अनियमितताओं और किसानों को भुगतान में देरी का आरोप लगाया। इसके बाद सदन में गरमागरम बहस हुई।
5,500 करोड़ रुपये 51,000 किसानों के खाते में डाले गए
सहकारिता एवं विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने सदन को बताया कि इस वर्ष राज्य में 562 केन्द्रों पर रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन की खरीद की गई। रावल ने कहा कि 51,000 से अधिक किसानों ने अपनी उपज बेची और 5,500 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए गए हैं।
रावल ने 36 लाख रुपये रोके जाने की बात को स्वीकारा
हालाँकि, अकोला जिले के बालापुर तालुका में एक घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मंत्री ने कहा कि किसानों का एक समूह,अंदुरा शेतकरी कंपनी, खरीद रिकॉर्ड में पंजीकृत होने के बावजूद गोदाम में 1,297 क्विंटल सोयाबीन पहुंचाने में विफल रही। उन्होंने बताया कि कंपनी प्रमुख के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है औक जांच लंबित रहने तक 36 लाख रुपये रोक लिए गए हैं।
रावल ने आश्वासन दिया कि इससे प्रभावित किसानों को भुगतान सुनिश्चित करने के प्रयास चल रहे हैं। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने विरोध करने के लिए सदन से बहिर्गमन किया।
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस।
- फोटो : एएनआई (फाइल)
ड्रक तस्करों पर कठोर कार्रवाई के लिए कानून में संशोधन करेगी राज्य सरकार
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ड्रग तस्करों पर कठोर कार्रवाई करेन के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन करेगी। इसे महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के अंदर लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संशोधन राज्य विधानमंडल के चल रहे मानसून सत्र में किया जाएगा।
जमानत मिलने के बाद अक्सर तस्करी दोबारा शुरू हो जाती
विधान परिषद में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए फडणवीस ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और वर्तमान में उन पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाता है। हालांकि, गिरफ्तार किए गए लोगों को जमानत मिल जाती है और वे फिर से अपनी गतिविधियां शुरू कर देते हैं। इसलिए सरकार कानून में संशोधन कर रही है।