कई बार डेडलाइन बढ़ने के बाद इस सप्ताह देश में गोल्ड हॉलमार्किंग अनिवार्य हो गई और इस नियम के लागू होने से ही यह सुनिश्चित हो गया है कि उपभोक्ता सोने के गहने खरीदते समय धोखा नहीं खाएंगे और उन्हें आभूषणों पर अंकित शुद्धता के अनुसार ही आभूषणों की प्राप्ति होगी। देशभर में ग्राहकों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने इस नियम को लागू किया है। इसे लागू करना इसलिए अनिवाय था क्योंकि पूर्व में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब ज्वैलर्स ने सोने के नाम पर उपभोक्ताओं को ठगा हो। ज्वैलर्स अपने ग्राहकों को ज्यादा शुद्धता वाले सोने के दाम पर कम शुद्धता वाले सोने के गहने बेच देते थे। लेकिन अब ज्वैलर्स का उपभोक्ताओं को ठगने का रास्ता बंद हो गया है।
कैरेट से कैसे पता चलता है कि सोना कितना शुद्ध है?
ज्वैलर्स अब सिर्फ 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट के सोने के आभूषण बेच सकते हैं-
उदाहरण से समझिए पूरी गणना
एक कैरेट सोने का अर्थ होता है 1/24 गोल्ड। यदि आपको 18 कैरेट का सोना खरीदना है, तो 18 को 24 से भाग कर उसे 100 से गुणा करें। (18/24)x100= 75
यानी आपके आभूषण में इस्तेमाल सोने की शुद्धता 75 फीसदी है।
24 कैरेट सोने को सबसे शुद्ध सोना माना जाता है। लेकिन इसके आभूषण नहीं बनते। ऐसा इसलिए क्योंकि वो बहुत मुलायम हो जाता है। ज्यादातर आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का ही इस्तेमाल होता है।
कौन से कैरेट के लिए कौन सा नंबर होगा अंकित?
हर कैरेट के सोने के लिए हॉलमार्क नंबर अंकित किए जाते हैं। ज्वैलर्स की ओर से 22 कैरेट के लिए 916 नंबर का इस्तेमाल किया जाता है। 18 कैरेट के लिए 750 नंबर का इस्तेमाल करते हैं और 14 कैरेट के लिए 585 नंबर का उपयोग किया जाता है। इन अंकों के जरिए आपको पता चल जाएगा कि सोना कितने कैरेट का है।